Bhagwat Meets PM Modi: पहलगाम आतंकवादी हमले के दोषियों और इसके सरगनाओं को सजा देने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सेना को मंगलवार को खुली छूट दे दी। मंगलवार शाम तीन सेना प्रमुखों, सीडीएस, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उच्च स्तरीय बैठक हुई। इस बैठक के बाद पीएम ने कहा कि उन्हें भारतीय सेना पर पूरा भरोसा है। आतंक पर करारा प्रहार कब और कैसे करना है और इसका तरीका क्या होगा, यह सब सेना तय करेगी। सेना को आतंक का खात्म करने की खुली छूट दे दी गई है।
पीएम मोदी से उनके सरकारी आवास पर मिले आरएसएस प्रमुख।
पीएम से मिले अमित शाह
इस अहम बैठक के बाद गृह मंत्री अमित शाह पीएम मोदी से मिलने पहुंचे। समझा जाता है कि गृह मंत्री ने देश की आंतरिक सुरक्षा और तैयारियों के बारे में पीएम को अवगत कराया। इन दो बैठकों के बाद राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख मोहन भागवत प्रधानमंत्री मोदी से मिलने उनके 7 लोक कल्याण मार्ग स्थित सरकारी आवास पहुंचे। सूत्रों के मुताबिक आरएसएस प्रमुख ने कहा कि संघ सरकार के हर फैसले के साथ खड़ा रहेगा और स्वयंसेवक हर मोर्चे पर देश के लिए डटे रहेंगे। सूत्रों का कहना है कि पीएम और भागवत के बीच यह बैठक करीब डेढ़ घंटे तक चली।
समझा जाता है कि पीएम मोदी और भागवत के बीच भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव और सांगठनिक फेरबदल के सिलसिले में भी चर्चा हुई।
करारा जवाब देना हमारा राष्ट्रीय संकल्प-PM
सरकारी सूत्रों के मुताबिक, बैठक में मोदी ने कहा, ‘आतंकवाद को करारा जवाब देना हमारा राष्ट्रीय संकल्प है’। सूत्रों के अनुसार, प्रधानमंत्री ने सशस्त्र बलों की क्षमता में पूर्ण विश्वास व्यक्त किया। एक सूत्र ने मोदी के हवाले से कहा, 'उन्हें (सशस्त्र बलों को) हमारी जवाबी कार्रवाई के तरीके, लक्ष्य और समय के बारे में फैसला लेने की पूरी अभियानगत छूट है।' इस बैठक में प्रमुख रक्षा अध्यक्ष (सीडीएस) जनरल अनिल चौहान भी शामिल हुए। यह बैठक पहलगाम आतंकवादी हमले के जवाब में भारत द्वारा उठाए जाने वाले संभावित कदमों पर विचार किए जाने के बीच हुई।
बैसरन घाटी में 22 अप्रैल को हुआ हमला
पहलगाम के लोकप्रिय पर्यटन स्थल बैसरन में 22 अप्रैल को हुए आतंकवादी हमले में कम से कम 26 लोग मारे गए थे, जिनमें से अधिकतर पर्यटक थे।
प्रधानमंत्री मोदी ने इस हमले में शामिल आतंकवादियों और उनके आकाओं का 'पृथ्वी के अंतिम छोर तक' पीछा करने और उन्हें 'उनकी कल्पना से परे' कड़ी से कड़ी सजा देने का आह्वान किया है। पहलगाम हमला जम्मू-कश्मीर में नागरिकों पर पिछले कई वर्षों में हुआ सबसे घातक हमला है, जिसे लेकर पूरे देश में आक्रोश की लहर है और हमलावरों तथा उनके आकाओं के खिलाफ कठोर जवाबी कार्रवाई की मांग उठ रही है। प्रधानमंत्री की कठोर टिप्पणियों और राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दों पर उनकी सरकार के कड़े रुख के कारण भारत की ओर से करारी जवाबी कार्रवाई की उम्मीदें बढ़ गई हैं।
2016 में पीओके में की सर्जिकल स्ट्राइक
मोदी सरकार ने 2016 में उरी में सेना के जवानों पर आतंकवादी हमले के बाद पाकिस्तान के अंदर ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ की थी। उसने पुलवामा में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के काफिले को निशाना बनाए जाने के बाद पाकिस्तान के बालाकोट में आतंकवादी ठिकानों पर हवाई हमला किया था। पहलगाम हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ कई कदम उठाए हैं, जिनमें पड़ोसी देश के साथ सिंधु जल संधि को स्थगित करना भी शामिल है। सूत्रों ने बताया कि इससे पहले दिन में केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन ने एक उच्च स्तरीय बैठक की अध्यक्षता की, जिसमें तीनों सेनाओं के प्रमुख और दो अन्य सुरक्षा संगठनों के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए थे। बैठक के एजेंडे पर कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं आई है।
