Haldighati Vijay: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत ने बुधवार को कहा कि हल्दीघाटी की लड़ाई में जीत इसलिए मिली, क्योंकि महाराणा प्रताप का जन्म हुआ।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत
आरएसएस प्रमुख ने राजस्थान के उदयपुर में हल्दीघाटी युद्ध में मिली जीत के 450 साल पूरे होने पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने कहा, ''वह हल्दीघाटी युद्ध के 450वें वर्ष के कार्यक्रम के लिए एक दिन पहले आए, क्योंकि यही दिन उपलब्ध था... इस बार महाराणा प्रताप की जयंती और हल्दीघाटी युद्ध की वर्षगांठ एक ही समय पर पड़ी।''
RSS प्रमुख ने क्या कुछ कहा?
उन्होंने कहा कि हल्दीघाटी युद्ध में विजय इसलिए हुई, क्योंकि महाराणा प्रताप का जन्म हुआ था। उनके अनुसार, आज का दिन (जयंती) कल के दिन (युद्ध में विजय) का कारण है। उन्होंने जोर देकर कहा कि हल्दीघाटी युद्ध में भारत के पक्ष से लड़ने वाले लोगों (महाराणा प्रताप) की ही विजय हुई थी। हालांकि, बाद में विमर्श (नैरेटिव) उल्टा चलाया गया।
उन्होंने कहा कि अगर हम सुनें कि मुगल इतिहासकारों ने खुद क्या लिखा है, तो वे कहते हैं कि पहले हमले में ही मुगल सेना को अपना स्थान छोड़कर छह-सात मील पीछे भागना पड़ा था। दूसरे हमले में एक बख्तरबंद मुगल सरदार को उसके घोड़े सहित बीच से चीर दिया गया था और सेनापति के हाथी पर चेतक (महाराणा प्रताप का घोड़ा) ने अपने पैर रख दिए।
आरएसएस प्रमुख ने बताया कि युद्ध के बाद मुगल सेना भागकर गोगुंदा चली गई और वहां दीवारों का घेरा बनाया और बाहर आने की हिम्मत नहीं की। वहां स्थिति इतनी खराब थी कि खाना खत्म हो गया तो मुगल सैनिकों ने अपने ही घोड़ों का मांस खाया, लेकिन वे किले से बाहर नहीं निकले।
हिंदुवा सूरज की हुई थी स्थापना
मोहन भागवत ने कहा कि हल्दीघाटी युद्ध के तीसरे चरण में महाराणा प्रताप को पूर्ण विजय मिली। उन्होंने अपनी सेना को चतुराई से मैदान से पहाड़ों में सुरक्षित कर लिया था। मेवाड़ को मुक्त करने के बाद चावंड को राजधानी बनाया गया और मुगलों द्वारा कब्जा किए गए सभी स्थानों को वापस छुड़वा लिया गया। उन्होंने 'हिंदुवा सूरज' के रूप में धर्म, न्याय और नीति पर आधारित एक हिंदू साम्राज्य की स्थापना की।
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हल्दीघाटी में महाराणा प्रताप की हुई जीत
उन्होंने कहा कि आज महाराणा प्रताप की जयंती मनाई जाती है, जबकि अकबर विस्मृति में चला गया है... दुनिया में कहीं पर भी आपने सुना है अकबर की जयंती होती है? उन्होंने कहा कि आज जो हम धर्म और संस्कृति की बातें कर रहे हैं, वह इस बात का प्रमाण है कि हल्दीघाटी में महाराणा प्रताप की ही जीत हुई थी। इस दौरान, उन्होंने एक बात स्पष्ट की कि हल्दीघाटी युद्ध महाराणा प्रताप ने जीता था, लेकिन सेना और सामर्थ्य के लिहाज से अकबर का पलड़ा भारी था। उन्होंने आगे रामचरित मानस की एक चौपाई भी सुनाई। साथ ही उन्होंने चाणक्य के मंत्र 'न आर्यस दास भाव' का उल्लेख करते हुए कहा कि हम सुसंस्कृत हैं और गुलामी स्वीकार नहीं करते हैं। कोई आक्रांता जब हमारी भूमि में पैर रखता है उस दिन से उसको भगाने के प्रयास शुरू हो जाते हैं... भारत में आने के बाद और बादशाह बनने के बाद भी अकबर एक दिन भी चैन की नींद नहीं सो सका।
उन्होंने कहा कि हमारा इतिहास गुलाम होने का इतिहास नहीं है, हमारा इतिहास गुलाम करने वालों के खिलाफ संघर्ष का इतिहास है। महाराणा प्रताप ने आक्रांताओं को संदेश दिया कि भारत जिंदा है, प्रबल भी है और तुमको भगा भी सकता है।
