बिहार की सियासत में राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) को लेकर एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। पार्टी के भीतर सब कुछ ठीक होने के दावों के बीच तीन विधायकों के अलग रुख ने नई चर्चा छेड़ दी है। मामला MLC चुनाव से जुड़ा है, जहां RLM के तीन विधायक माधव आनंद, रामेश्वर महतो और आलोक सिंह पार्टी नेतृत्व से अलग खड़े नजर आ रहे हैं। वहीं, विधायक माधव आनंद के एक बयान ने इस पूरे घटनाक्रम को और दिलचस्प बना दिया है। उन्होंने साफ कहा कि पार्टी को बचाने के लिए अगर कुर्बानी देनी पड़े तो वह पीछे नहीं हटेंगे।
माधव आनंद,आलोक सिंह और रामेश्वर महतो
इस घटनाक्रम के बाद सवाल उठ रहा है कि आखिर RLM में फैसले की अंतिम ताकत किसके पास है? पार्टी प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा के पास या फिर तीन विधायकों के अलग रुख के पास?
MLC चुनाव ने बढ़ाई अंदरूनी हलचल
दरअसल, हालिया MLC चुनाव को लेकर RLM के तीन विधायक माधव आनंद, रामेश्वर महतो और आलोक सिंह पार्टी नेतृत्व से अलग रुख अपनाते दिखाई दिए हैं। तीनों ने RLM नेता रामपुकार सिन्हा के समर्थन में खड़े होने का फैसला किया है। इसी के बाद पार्टी के भीतर मतभेद की चर्चाओं ने जोर पकड़ लिया।
माधव आनंद के बयान ने भी इस सियासी घटनाक्रम को नया रंग दे दिया है। उन्होंने कहा कि पार्टी को बचाना जरूरी है और इसके लिए अगर कुर्बानी देनी पड़ेगी तो वह तैयार हैं। उनका कहना है कि जनता चाहती है कि RLM का अस्तित्व बना रहे और पार्टी मजबूत हो।
2029 के गठबंधन का भी दिया हवाला
माधव आनंद ने पार्टी के भविष्य को लेकर भी अपनी बात रखी। उन्होंने आने वाले समय में BJP के साथ गठबंधन की स्थिति में भी RLM का मजबूत रहना जरूरी है। उनका तर्क है कि यदि पार्टी ही कमजोर हो गई तो राजनीतिक तौर पर उसकी भूमिका भी प्रभावित होगी।
उपेंद्र कुशवाहा बोले- कोई बगावत नहीं
दूसरी ओर,RLM प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा ने पार्टी के भीतर किसी भी तरह की बगावत से इनकार किया है। उनका कहना है कि पार्टी में कोई विधायक बागी नहीं हुआ है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया है कि RLM NDA उम्मीदवारों के साथ खड़ी है।
ऐसे में तीन विधायकों के अलग रुख और उपेंद्र कुशवाहा के बयान के बीच पार्टी के भीतर वास्तविक स्थिति को लेकर सवाल उठ रहे हैं। आने वाले दिनों में MLC चुनाव को लेकर RLM का रुख और विधायकों की भूमिका इस पूरे विवाद की दिशा तय कर सकती है।
