RG Kar Hospital rape murder case: कोलकाता के केजी कर अस्पताल में ट्रेनी महिला डॉक्टर के साथ हुए रेप और मर्डर के बाद देश भर में गुस्सा और आक्रोश है। इस घटना ने लोगों को झकझोर कर रख दिया है। दिल्ली, मुंबई, केरल, गुजरात, यूपी, पंजाब सहित देश भर के अस्पतालों के डॉक्टर हड़ताल पर हैं। वे दोषियों को सजा दिलाने और पीड़ित परिवार को न्याय देने की मांग कर रहे हैं। 31 साल की डॉक्टर के साथ हुई इस घिनोनी वारदात पर राजनीति भी जमकर हो रही है। भाजपा और वाम दलों के निशाने पर सीधे मुख्यमंत्री ममता बनर्जी हैं। इस घटना पर ममता सरकार के खिलाफ लोगों में बेहद नाराजगी और गुस्सा है। यहा गुस्सा जायज भी है क्योंकि इस पूरे मामले में ममता सरकार और कोलकाता पुलिस का जो ढुलमुल और लापरवाह रवैया रहा है, वह कई सवाल खड़े करता है। इस पूरे मामले में पुलिस की भूमिका संदिग्ध दिख रही है। चूंकि जांच अब सीबीआई के हवाले है, ऐसे में इस रेप एवं मर्डर कांड की असलियत से परदा उठने की उम्मीद बढ़ गई है।
घटना के बाद भाजपा के निशाने पर हैं ममता बनर्जी।
पहले आत्महत्या की बात फिर रेप एवं मर्डर
दरअसल, केजी कर अस्पताल के सेमिनार हॉल में ट्रेनी डॉक्टर के साथ दरिंदगी हुई। पहले इसे खुदकुशी का मामला बताया गया। जाहिर है कि अस्पताल प्रबंधन और पुलिस ने इस जघन्य और घिनौनी घटना को छिपाना चाहा लेकिन अपनी बेटी के शव की हालत देखने के बाद से ही पीड़ित परिवार खुदकुशी की बात मानने के लिए तैयार नहीं हुआ। उसने साफ कहा कि उनकी बेटी के साथ वहशीपन हुआ है। फिर पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने लेडी डॉक्टर के साथ हुई बर्बरता की पूरी दर्दभरी दास्तां खोलकर सामने रख दी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट की मानें तो ट्रेनी डॉक्टर के साथ जंगली जानवर जैसी दरिंदगी की गई। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के तथ्य परेशान करने वाले हैं।
यह भी पढ़ें- चुनाव आयोग की आज अहम प्रेस कांफ्रेंस, हरियाणा और जम्मू कश्मीर में विधानसभा चुनाव तारीखों का होगा ऐलान
पोस्ट मार्टम रिपोर्ट में क्या है?
डॉक्टर की पोस्टमार्टम रिपोर्ट इतनी भयावह है कि उसे देखकर लोग सिहर गए। रिपोर्ट में महिला डॉक्टर के साथ कई बार पेनिट्रेशन की संभावना जताई गई है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट देखने के बाद डॉक्टरों का मानना है कि लेडी डॉक्टर के साथ काफी क्रूरता हुई और जिस समय यह घटना हुई उस समय मौके पर एक से ज्यादा लोग मौजूद रहे होंगे। क्या पुलिस ने इस आशंका को देखते हुए किसी संदिग्ध को हिरासत में लिया है? पोस्टमार्टम रिपोर्ट में डॉक्टर की मौत सुबह 3 से 5 बजे के बीच होने की बात कही गई है। डॉक्टर के शरीर होंठ, नाक, गाल और निचले जबड़े पर चोटें मिली हैं। उसकी खोपड़ी की टेम्पोरल हड्डी पर चोट और उसके सामने के हिस्से पर खून जमने का भी जिक्र है। यही नहीं, महिला के प्राइवेट पार्ट से 151 ग्राम सीमेन मिला है। डॉक्टरों का कहना है कि सीमेन कि इतनी मात्रा किसी एक शख्स की नहीं हो सकती। रिपोर्ट के मुताबिक डॉक्टर का गला घोंटा गया और फिर उसे मार डाला गया।
गिरफ्तार 19 लोग कौन हैं?
दबाव बढ़ने पर अस्पताल पर हमला मामले में पुलिस ने अब तक19 लोगों को गिरफ्तार किया है लेकिन ये 19 लोग कौन हैं, पुलिस इनके बारे में कुछ नहीं बता रही है। क्या इनमें से किसी का 9 अगस्त की घटना के साथ कोई संबंध है, इस पर भी रहस्य है। 14 अगस्त की रात अस्पताल में प्रदर्शनकारी घुस गए और सेमिनार हाल जहां डॉक्टर का रेप और मर्डर हुआ, वहां जमकर तोड़फोड़ की। क्राइम सीन को नुकसान पहुंचाया। यह सब कोलकाता पुलिस की मौजूदगी में हुआ। बताया जा रहा है कि प्रदर्शनकारियों के आगे ममता पुलिस बेबस हो गई। उसने लाठी चार्ज किया और आंसू गैस के गोले दागे फिर भी वह प्रदर्शनकारियों को काबू में नहीं कर पाई। उत्पाती अस्पताल में दाखिल हुए और क्राइम सीन को तहस-नहश कर दिया। कोलकाता में धरने पर बैठे प्रदर्नकारी डॉक्टर इस घटना से हैरान हो गए, उन्हें नहीं पता कि ये प्रदर्शनकारी कौन हैं। अस्पताल में दाखिल होने ये कौन लोग थे, इसके बारे में कोई जानकारी पुलिस नहीं दे पाई है।
ममता ने प्रिंसिपल का इस्तीफा स्वीकार नहीं किया
घटना के बाद जब दबाव बढ़ा तो अस्पताल के प्रिंसिपल संदीप घोष ने इस्तीफा दे दिया लेकिन उनका इस्तीफा ममता बनर्जी ने स्वीकार नहीं किया। ममता ने घोष की जगह सुहृता पाल को प्रिंसिपल नियुक्त कर दिया। यही नहीं, ममता ने संदीप को दूसरे कॉलेज का प्रिंसिपल बना दिया। संदीप घोष के प्रति नरम रुख को लेकर भी ममता बनर्जी पर सवाल उठ रहे हैं। ममता के इस कदम से टीएमसी के कई नेता भी खुश नहीं हैं। प्रिंसिपल की नियुक्ति मामले में कोलकाता हाई कोर्ट की टिप्पणी भी सवाल खड़े करती है। कोर्ट ने पूछा कि अस्पताल में डॉक्टर की मौत हुई तो इसकी शिकायत क्यों नहीं की गई? यह संदेह पैदा करता है।
याद आया 2012 का निर्भया कांड
दिल दहला देने वाले इस रेप एवं मर्डर कांड ने दिल्ली में 16 दिसंबर 2012 को हुए निर्भया कांड की यादें ताजा कर दी हैं। निर्भया गैंगरेप पर पूरा देश उबल गया था। इंसाफ और दोषियों को मौत की सजा की मांग करते हुए दिल्ली में संसद से लेकर इंडिया गेट और राष्ट्रपति भवन तक का लोगों ने घेराव कर दिया था। लोगों के आक्रोश को देखते हुए सरकार को झुकना पड़ा। कानून में बदलाव हुआ। निर्भया के दोषियों एक नाबालिग को छोड़कर बाकियों को फांसी की सजा भी हो गई। लेकिन इस घटना के बाद हम फिर उसी मोड़ पर आकर खड़े हो गए हैं जहां 12 साल पहले खड़े थे। एक समाज के तौर पर चार दीवारी और वह भी अस्पताल में हम बेटियों की सुरक्षा नहीं कर पा रहे हैं। लड़कियों और महिलाओं को केवल 'शिकार' समझने और जंगली मानसिकता वाले वहशी अब भी समाज में घूम रहे हैं और वे मौके की तलाश में है।
