अयोध्या स्थित श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के वित्तीय प्रबंधन और दान राशि के इस्तेमाल को लेकर राष्ट्रीय जनता दल के बक्सर से सांसद सुधाकर सिंह ने सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दाखिल की है। यह याचिका 3 जुलाई दाखिल की गई है। याचिका अधिवक्ता सत्यम सिंह राजपूत और एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड जसवंती ए. के जरिए दायर की गई है।
राम मंदिर ट्रस्ट के फंड पर सवाल (फाइल फोटो)
याचिका में ट्रस्ट के वित्तीय मामलों की स्वतंत्र जांच और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए कई निर्देश जारी करने की मांग की गई है। याचिका में स्पष्ट किया गया है कि इसका उद्देश्य मंदिर की धार्मिक गतिविधियों या पूजा-पद्धति में कोई हस्तक्षेप नहीं, बल्कि केवल ट्रस्ट के वित्तीय और प्रशासनिक मामलों की जांच है।
याचिका में क्या-क्या मांग की गई है?
याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट से मांग की है कि ट्रस्ट में दान और चंदे के इस्तेमाल से जुड़े आरोपों की जांच राज्य पुलिस से लेकर CBI को सौंपी जाए और यह जांच सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में कराई जाए।इसके अलावा कोर्ट की निगरानी में सेवानिवृत्त न्यायिक अधिकारियों और वित्तीय विशेषज्ञों की एक ओवरसाइट कमेटी गठित करने की भी मांग की गई है, जो जांच पूरी होने तक ट्रस्ट के वित्तीय और प्रशासनिक कामकाज की निगरानी करे।
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रिकॉर्ड सुरक्षित रखने और बड़े फैसलों पर रोक की मांग
याचिका में कहा गया है कि जांच के दौरान ट्रस्ट के सभी वित्तीय रिकॉर्ड, बैंक दस्तावेज, लेजर, UPI ट्रांजैक्शन, डिजिटल रिकॉर्ड, CCTV फुटेज और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण सुरक्षित रखे जाएं ताकि किसी भी साक्ष्य से छेड़छाड़ न हो सके।साथ ही कोर्ट से अनुरोध किया गया है कि जांच पूरी होने तक ट्रस्ट बिना कोर्ट की निगरानी वाली समिति की अनुमति के कोई बड़ा वित्तीय या प्रशासनिक फैसला न ले, न बड़े ठेके दे और न ही ट्रस्ट की संपत्तियों या निवेश से जुड़े महत्वपूर्ण निर्णय करे।
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फॉरेंसिक ऑडिट और सार्वजनिक पारदर्शिता की भी मांग
याचिका में एक स्वतंत्र एजेंसी से ट्रस्ट के खातों, दान, बैंक लेन-देन और वित्तीय रिकॉर्ड का फॉरेंसिक ऑडिट कराने की मांग की गई है।इसके अलावा ट्रस्ट को निर्देश देने की भी मांग की गई है कि वह अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर नियमित रूप से दान की राशि, ऑडिटेड वित्तीय विवरण, फंड के इस्तेमाल, बड़े खर्च और दिए गए ठेकों की जानकारी सार्वजनिक करे।
अंतरिम राहत में क्या मांग?
याचिकाकर्ता ने अंतरिम राहत के तौर पर भी कोर्ट से तत्काल कोर्ट-निगरानी वाली ओवरसाइट कमेटी गठित करने, सभी रिकॉर्ड सुरक्षित रखने और जांच पूरी होने तक ट्रस्ट के बड़े वित्तीय फैसलों पर रोक लगाने की मांग की है।
