Ram Mandir News: तिलक-पंचकेशी अनिवार्य; गर्भगृह में मोबाइल-पर्स पर रोक... अर्चकों के लिए नई नियमावली; जानें सबकुछ

अयोध्या राम मंदिर में अर्चकों के लिए नई नियमावली लागू की गई है। सेवाकाल में पीत वस्त्र, तिलक और पंचकेशी परंपरा का पालन अनिवार्य होगा। गर्भगृह में मोबाइल, पर्स और निजी सामान ले जाने पर रोक रहेगी। शुचिता, अनुशासन और ड्यूटी के दौरान आचार-व्यवहार को लेकर भी अर्चकों के लिए कई निर्देश जारी किए गए हैं।

Ram Mandir News: अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में सेवा देने वाले अर्चकों के लिए नई नियमावली लागू की गई है। इसके तहत सेवाकाल के दौरान अर्चकों को निर्धारित पीत वस्त्र पहनना होगा। साथ ही तिलक लगाना और पंचकेशी परंपरा का पालन करना अनिवार्य किया गया है। गर्भगृह में मोबाइल फोन, पर्स या किसी भी निजी सामान को ले जाने पर रोक लगा दी गई है।

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Ayodhya Ram Mandir: अर्चकों के लिए सख्त गाइडलाइन जारी हुई।

निर्धारित वस्त्र और पंचकेशी का पालन जरूरी

नई व्यवस्था के तहत अर्चकों को धार्मिक समिति की ओर से निर्धारित पीत वस्त्र पहनने होंगे। मौसम के अनुसार वस्त्रों में बदलाव की अनुमति होगी। सेवाकाल में तिलक लगाना अनिवार्य रहेगा। साथ ही बाल, दाढ़ी, मूंछ और शिखा से जुड़े पंचकेशी नियमों का पालन करना होगा।

गर्भगृह में मोबाइल और निजी सामान पर रोक

नई नियमावली के मुताबिक अर्चक गर्भगृह में मोबाइल फोन, पर्स या अन्य निजी सामान नहीं ले जा सकेंगे। मंदिर की ओर से उपलब्ध कराए गए भोग-प्रसाद के अलावा बाहर से किसी अन्य सामग्री को भी गर्भगृह में ले जाने की अनुमति नहीं होगी। निजी सामान रखने के लिए लॉकर की व्यवस्था की गई है।

शुचिता को लेकर भी सख्त निर्देश

अर्चकों को शुचिता से जुड़े नियमों का भी पालन करना होगा। शौच के बाद बिना स्नान किए मंदिर या कोठार में प्रवेश की अनुमति नहीं होगी। सेवाकाल के दौरान अर्चक अपने निर्धारित सेवा स्थल पर रहेंगे। किसी जरूरी काम से स्थान छोड़ना होने पर पाली प्रमुख को लिखित रूप से इसकी जानकारी देनी होगी।

ड्यूटी के दौरान अनावश्यक बातचीत पर रोक

नई व्यवस्था में सेवाकाल के दौरान अनावश्यक बातचीत, समूह में चर्चा और हास-परिहास से बचने के निर्देश दिए गए हैं। मंदिर व्यवस्था, धर्मगुरु और आचार्यों के अलावा ट्रस्ट के कर्मचारियों या सुरक्षाकर्मियों से अनावश्यक संपर्क और बातचीत से भी बचने को कहा गया है। किसी तरह की असहमति या असहयोग की स्थिति में आचार्य से मार्गदर्शन लेने का निर्देश है।

नियमों के उल्लंघन पर कार्रवाई का प्रावधान

मंदिर की निर्धारित मर्यादा का उल्लंघन होने पर शुद्धिकरण की प्रक्रिया अपनाने का प्रावधान रखा गया है। नियमों का बार-बार उल्लंघन होने पर कार्रवाई भी की जा सकती है। मंदिर प्रशासन के मुताबिक नई व्यवस्था का उद्देश्य पूजा-पद्धति, शुचिता और अर्चकों के सेवाकाल में अनुशासन बनाए रखना है।

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