अदालतों में लंबित पड़े लाखों मामलों के जल्द निपटारे और न्याय प्रणाली को मजबूत करने की दिशा में केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। राज्यसभा ने बुधवार को ध्वनिमत से 'सुप्रीम कोर्ट (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन विधेयक 2026' को पारित कर दिया। इस बिल के पास होने के बाद अब शीर्ष अदालत में मुख्य न्यायाधीश (CJI) को छोड़कर जजों की स्वीकृत संख्या 33 से बढ़कर 37 हो जाएगी। यह विधेयक लोकसभा में 3 अगस्त को ही पास हो चुका था।
सुप्रीम कोर्ट में बढ़ेंगे जज (फाइल फोटो)
संसद के उच्च सदन में चर्चा का जवाब देते हुए कानून और न्याय राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने स्पष्ट किया कि सरकार न्यायपालिका की स्वतंत्रता को बनाए रखने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने बताया कि हर साल सुप्रीम कोर्ट में केस दर्ज होने की दर काफी तेज हुई है। मुख्य न्यायाधीश ने मई में प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर जानकारी दी थी कि सालाना दर्ज होने वाले मुकदमों और उनके निपटारे के बीच लगभग 10,000 मामलों का अंतर आ रहा है, जिसे जजों की संख्या बढ़ाए बिना खत्म करना संभव नहीं था।
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अब लंबित मामलों की होगी तीव्र गति से सुनवाई
कानून मंत्री ने कहा कि जब सबरीमाला जैसे बड़े मामलों में 9 जजों की संविधान पीठ बैठती है, तो नियमित पीठों में जजों की कमी हो जाती है, जिससे सामान्य मुकदमों की सुनवाई टलती रहती है। अब 37 जज होने से स्थायी संविधान पीठ के साथ-साथ दशकों पुराने दीवानी और आपराधिक मामलों की सुनवाई के लिए 3 से 4 समर्पित पीठें बनाई जा सकेंगी। जून में अध्यादेश आने के बाद ही 5 नए जजों की नियुक्ति भी की जा चुकी है।
ई-कोर्ट्स प्रोजेक्ट
इसके अलावा, सरकार ने न्यायिक बुनियादी ढांचे को बेहतर बनाने के लिए सुप्रीम कोर्ट परिसर के विस्तार हेतु 795.53 करोड़ रुपये और तकनीक से जोड़ने के लिए 'ई-कोर्ट्स प्रोजेक्ट' के तहत 7,210 करोड़ रुपये से अधिक का बजट दिया है। देश में जजों और आबादी के अनुपात में भी सुधार हुआ है, जो 2014 में प्रति दस लाख पर 16.11 था और अब बढ़कर 22.33 हो चुका है।
