Rajya Sabha Elections: मध्यप्रदेश में राज्यसभा की तीन सीटों पर हो रहे चुनाव में मंगलवार को उस समय नाटकीय मोड़ आ गया, जब शपथपत्र में जानकारी छुपाने के आरोप में कांग्रेस की उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द कर दिया गया। कांग्रेस ने इसे लोकतंत्र की हत्या करार देते हुए आरोप लगाया कि यह अब ’वोट चोरी’ का मामला नहीं रहा, बल्कि ’सीट चोरी’ का मामला बन गया है। साथ ही पार्टी ने इस प्रकरण को अदालत में चुनौती देने का भी फैसला किया है। वहीं, चुनाव आयोग ने कांग्रेस के प्रतिनिधि मंडल को आज 12 बजे वार्ता के लिए बुलाया है।
मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द होने पर सियासत तेज।
हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट कहां जाएगी कांग्रेस?
पार्टी इस मुद्दे को उच्च न्यायालय में चुनौती देगी या सीधे उच्चतम न्यायालय का रुख करेगी, इस बारे में उसके नेताओं ने कुछ भी स्पष्ट नहीं बताया, लेकिन वरिष्ठ अधिवक्ता और पार्टी के राज्यसभा सदस्य विवेक तन्खा ने सुझाव दिया कि यह ऐसा मामला है जिसे सीधे उच्चतम न्यायालय में चुनौती दी जानी चाहिए।
राज्य निर्वाचन आयोग के बाहर धरना दे रहे कांग्रेसी नेता
इस बीच, कांग्रेस ने भोपाल में राज्य निर्वाचन आयोग के बाहर धरना आरंभ कर दिया है। उधर, कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता देश की राजधानी दिल्ली में निर्वाचन आयोग के मुख्यालय पहुंच गए और अंदर प्रवेश की अनुमति नहीं मिलने पर मुख्य द्वार पर ही धरने पर बैठ गए।
चुनाव आयोग ने दिया 12 बजे का समय
नटराजन की उम्मीदवारी रद्द किए जाने पर कांग्रेस बेहद नाराज है और इसे चुनाव आयोग तक लेकर गई है। केसी वेणुगोपाल, सचिन पायलट, जयराम रमेश, भूपेश बघेल सहित कांग्रेस के दिग्गज नेता चुनाव आयोग के कार्यालय पहुंचे लेकिन वहां ताला लगा हुआ मिला। कांग्रेस नेताओं ने गेट खुलवाने की कोशिश की लेकिन वहां तैनात सुरक्षाकर्मियों ने गेट खोलने से मना कर दिया। इसके बाद कांग्रेस नेता वहीं धरने पर बैठ गए। वहीं, भारत निर्वाचन आयोग ने कल दोपहर 12 बजे भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के प्रतिनिधिमंडल को बातचीत के लिए मिलने का समय देने का निर्णय लिया है।
नामांकन रद्द होने पर क्या बोलीं नटराजन?
वहीं, नामांकन रद्द होने के बाद नटराजन ने कहा कि जब सदस्यों की संख्या पर्याप्त नहीं थी और भाजपा ने तीसरा उम्मीदवार उतार दिया तभी यह स्पष्ट हो गया था कि भाजपा लोकतंत्र और संविधान को ’कुचलने’ के प्रयास में है। अभी तक तो मामला वोट चोरी तक सीमित था, अब यह सीट चोरी हो गया है। जब उन्हें लगा कि कांग्रेस के विधायक एकजुट हैं तो उन्होंने उस कानूनी नोटिस की आड़ ली जिसे संज्ञान में ही नहीं लिया गया। नटराजन ने कहा कि यह महज एक उम्मीदवारी के बारे में नहीं है, देश में एक गंभीर स्थिति है। हम इसे चुनौती देंगे।
विवेक तन्खा बोले- ये सीट चोरी का मामला
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता विवेक तन्खा ने नटराजन के नामांकन को निरस्त किए जाने पर तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि यह अब ’वोट चोरी’ का मामला नहीं रहा, बल्कि ’सीट चोरी’ का मामला बन गया है। राज्यसभा सदस्य तन्खा ने कहा कि उन्होंने स्वयं नामांकन पत्रों की जांच की है और उसमें ऐसी कोई भी जानकारी छिपाई नहीं गई थी, जिसे घोषित किया जाना आवश्यक हो।
उन्होंने कहा कि उनके (नटराजन) खिलाफ कोई प्राथमिकी दर्ज नहीं थी। केवल दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 223 के तहत एक नोटिस था, जिसमें एक आवेदक ने दावा किया था कि उन्हें और अन्य लोगों को 10 करोड़ रुपये का मुआवजा दिया जाना चाहिए। मीनाक्षी नटराजन ने उस नोटिस पर आपत्ति दर्ज करते हुए कहा था कि यह नोटिस उन्हें भेजा ही नहीं जा सकता, क्योंकि उनका उस मामले से कोई संबंध नहीं है।
तन्खा ने कहा, ’’न कोई अपराध दर्ज था, न कोई प्राथमिकी थी और न ही कोई विधिक प्रकरण लंबित था। ऐसे में वे आखिर कौन-सी बात प्राथमिकी या न्यायिक प्रकरण के रूप में घोषित किया गया, केवल किसी अदालत द्वारा नोटिस जारी कर देना अपने आप में कोई मामला या अपराध सिद्ध नहीं करता। तन्खा ने कहा कि मौजूदा परिस्थिति में चुनाव याचिका दायर की जा सकती है, लेकिन विशेष परिस्थितियों में पार्टी को सीधे उच्चतम न्यायालय का दरवाजा खटखटाना चाहिए।
क्या है मामला?
बता दें कि राज्यसभा की तीन सीटों के लिए 18 जून को चुनाव होना है। सोमवार को नामांकन की आखिरी तारीख थी जबकि आज नामांकन पत्रों की जांच की गई। इस दौरान जब मीनाक्षी नटरान के दस्तावेजों की जांच की गई तो पाया गया कि नटराजन ने नामांकन के साथ जमा किए गए फार्म 26 में ’न्यायालय परिवाद का उल्लेख नहीं करके अपना शपथ पत्र अपूर्ण प्रस्तुत किया है। जिसके बाद राज्यसभा चुनाव के निर्वाचन अधिकारी अरविंद शर्मा ने उनका नामांकन रद्द कर दिया।
मध्यप्रदेश विधानसभा के एक अधिकारी ने बताया कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के उम्मीदवार महेश केवट ने निर्वाचन अधिकारी के समक्ष शिकायत दर्ज कराई थी कि नटराजन ने अपने खिलाफ तेलंगाना में दर्ज एक मुकदमे का शपथ पत्र में कोई उल्लेख नहीं किया है। उन्होंने कहा कि इसे लेकर दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद निर्वाचन अधिकारी ने नटराजन का नामांकन निरस्त कर दिया।
वहीं, भाजपा प्रत्याशी महेश केवट के अधिवक्ता संकेत गुप्ता ने विधानसभा में पत्रकारों से बातचीत में कहा कि तेलंगाना की एक अदालत में नटराजन के खिलाफ एक आपराधिक मामला लंबित है और शपथपत्र में इसका उल्लेख नहीं है। उन्होंने कहा कि उच्चतम न्यायालय के दिशा-निर्देशों के मुताबिक शपथपत्र में सभी आपराधिक मामलों का उल्लेख किया जाना जरूरी है लेकिन नटराजन ने जानबूझकर इसे छुपाया। निर्वाचन अधिकारी ने इसी आधार पर नटराजन का नामांकन निरस्त कर दिया है।
कांग्रेस की थी ये तैयारी
निर्वाचन अधिकारी का यह फैसला ऐसे दिन आया जब ’क्रॉस वोटिंग’ से बचने और अपने खेमे को एकजुट रखने के मकसद से कांग्रेस ने अपने 35 विधायकों का पहला जत्था एक विशेष विमान से पार्टी शासित कर्नाटक के लिए रवाना कर दिया था जबकि दूसरे जत्थे को मंगलवार शाम को बेंगलुरु के लिए रवाना होना था।
किन सीटों पर चुनाव
मध्यप्रदेश में राज्यसभा की खाली हुई जिन तीन सीट पर चुनाव हो रहे हैं, उनमें से दो पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की जीत लगभग तय है जबकि संख्या बल के लिहाज से तीसरी सीट पर कांग्रेस का पलड़ा भारी था।
भाजपा ने राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुघ और राज्य इकाई के सचिव रजनीश अग्रवाल को मैदान में उतारा है और तीसरी सीट पर मध्यप्रदेश मछुआरा कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष महेश केवट पर दांव लगाया है।
