नई दिल्ली: कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आवास के बाहर धरने के दौरान पुलिस कार्रवाई पर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि उन्हें घूंसे खाने की आदत है और लोगों के हित में वह ऐसे और भी वार खुशी-खुशी सहने को तैयार हैं। उन्होंने कहा कि उनका दायित्व छात्रों, किसानों और युवाओं की आवाज उठाना है और इसके लिए चुकाई जाने वाली यह कोई बड़ी कीमत नहीं है।
राहुल गांधी।
बुधवार को आयोजित प्रेस कांफ्रेस में राहुल गांधी से मंगलवार को पीएम आवास के बाहर धरने के दौरान कथित तौर पर घूंसा मारे जाने को लेकर सवाल पूछा गया। इस पर उन्होंने कहा कि सब ठीक था। मुझे घूंसे खाने की आदत है,इसमें कोई समस्या नहीं है। नेता प्रतिपक्ष के रूप में मेरा काम भारत के लोगों की इच्छा और आवाज को सामने रखना है,चाहे वह छात्रों की हो, किसानों की हो या युवाओं की।
'देश के लोगों की आवाज बनना मेरी जिम्मेदारी'
राहुल गांधी ने कहा कि उनसे अपेक्षा की जाती है कि वे देश के लोगों की आवाज बनें और जहां लोगों को पीड़ा हो रही हो, वहां देश का ध्यान आकर्षित करें। इसके लिए चुकाई जाने वाली यह बहुत छोटी कीमत है। मेरे लिए यह सम्मान की बात है कि मैं अपने देश के लोगों की भावनाओं और इच्छाओं के साथ खड़ा रह सकूं। दो-चार घूंसों या ऐसे किसी व्यवहार से कोई फर्क नहीं पड़ता। लोगों के लिए मैं ऐसे और भी कई वार खुशी-खुशी सहने को तैयार हूं।
'पुलिसकर्मियों ने कान में कहा- इस सरकार को हटाइए'
वहीं,धरना खत्म कराने के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई का जिक्र करते हुए राहुल गांधी ने दावा किया कि पुलिसकर्मी उन्हें घसीटकर ले गए,लेकिन उसी दौरान कुछ पुलिसकर्मियों ने उनके कान में फुसफुसाकर कहा, "इस सरकार को हटाइए।" उन्होंने कहा कि किसी ने कहा, "मैं राजस्थान का हूं, इन्हें हटाइए"। वहीं दूसरे ने कहा कि मैं हरियाणा का हूं, इन्हें हटाइए। वहीं, राहुल गांधी ने दावा किया कि इससे पता चलता है कि देश में ऐसी भावना मौजूद है और समझदार पुलिसकर्मियों को भी लगता है कि देश के भविष्य के साथ अन्याय हो रहा है।
'मुद्दा मेरा नहीं, छात्रों का भविष्य है'
राहुल गांधी ने कहा कि एक तरफ छात्र चाहते हैं कि देश का ध्यान उनके भविष्य और पेपर लीक जैसे मुद्दों पर केंद्रित रहे,जबकि दूसरी तरफ इन मुद्दों से ध्यान भटकाने की कोशिश की जा रही है।असली मुद्दा छात्रों का भविष्य, शिक्षा व्यवस्था, पेपर लीक और उन बच्चों की पीड़ा है। आप मेरे साथ जो चाहें करें, मुझे इसकी परवाह नहीं। बल्कि इससे मुझे सीखने का मौका मिलता है।
पीएम आवास के बाहर धरने के बाद हुई थी कार्रवाई
राहुल गांधी की यह टिप्पणी उस घटना के एक दिन बाद आई है, जब प्रधानमंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर उन्होंने प्रियंका गांधी वाड्रा और समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव के साथ पीएम आवास के बाहर धरना दिया था। इसके बाद पुलिस ने तीनों नेताओं को वहां से हटाकर हिरासत में ले लिया था।
राहुल गांधी को बाद में मॉडल टाउन स्थित छत्रसाल स्टेडियम ले जाया गया,जहां से कुछ घंटों बाद उन्हें रिहा कर दिया गया। रिहाई के बाद उन्होंने कहा था कि जब यह स्पष्ट हो गया कि सरकार छात्रों के मुद्दे पर संसद में चर्चा कराने को तैयार नहीं है, तब उन्होंने प्रधानमंत्री आवास के बाहर धरना देने का फैसला किया।
