Rahul Gandhi Press Conference: दिल्ली में कांग्रेस नेता राहुल गांधी प्रेस कांफ्रेंस कर रहे हैं। इस प्रेस कांफ्रेंस में राहुल गांधी ने वर्तमान केंद्र सरकार और चुनाव आयोग पर निशाना साधते हुए कहा कि पहले एंटी इंकम्बेंसी आया करती है, सरकारें बदलते रहती थीं, लेकिन अब ऐसा नहीं होता है, बीजेपी लगातार जीत रही है। दो चुनाव आयुक्तों ने सवाल उठाए। उन सवालों को नजरअंदाज कर दिया गया। लोगों ने उन सवालों पर भरोसा किया, लेकिन संस्थागत ढांचे ने उनका कोई जवाब नहीं दिया। ज्ञानेश कुमार को खुद प्रधानमंत्री ने चुना था। अब दो चुनाव आयुक्त कह रहे हैं कि ज्ञानेश कुमार इसके लिए जिम्मेदार हैं। हम ऐसी स्थिति में हैं, जिसका सामना भारत ने 1947 के बाद से नहीं किया है। हमारे वोट के साथ समझौता किया गया है और हमारी संस्थाओं के साथ भी समझौता किया गया है। आजादी के बाद यह पहली बार है जब हम खुद को ऐसी स्थिति में पा रहे हैं। ज्ञानेश कुमार को तत्काल इस्तीफा देना चाहिए।
कांग्रेस नेता राहुल गांधी की प्रेस कांफ्रेंस
राहुल गांधी ने इंदिरा गांधी का दिया उदाहरण
राहुल गांधी ने इसका उदाहरण देते हुए कहा कि इंदिरा गांधी तक ने बांग्लादेश जंग के बाद एंटी इंकम्बेंसी झेला था, लेकिन आज ऐसा नहीं होता। हरियाणा में सरकार बदलते रहती थी, महाराष्ट्र में सरकार बदलते रहती थी, लेकिन अब ऐसा नहीं होता। वर्षों तक लगातार दबाव बनाए जाने के बाद कुछ जानकारियां सामने आने लगीं। हरियाणा वोट चोरी के सबसे गंभीर मामलों में से एक है, क्योंकि वहां जिस पैमाने पर विसंगतियां सामने आईं, वे बेहद गंभीर हैं।
वोट चोरी पर राहुल गांधी ने घेरा
राहुल गांधी ने आगे कहा कि वोट हमारे देश की बुनियाद है। इसकी रक्षा करना चुनाव आयोग की जिम्मेदारी है। अगर वोट के साथ छेड़छाड़ हुई है, तो इसका मतलब है कि हमारे संविधान के साथ भी समझौता हुआ है। फिर संविधान की ताकत खत्म हो जाती है और हमारे कानूनों की वैधता पर भी सवाल खड़ा हो जाता है। सवाल यह है कि यह भारत के हर एक नागरिक की अभिव्यक्ति पर हमला है। चुनाव आयोग वोट का संरक्षक है। वोट की रक्षा करना उसकी जिम्मेदारी है। बाकी सब कुछ इसी से जुड़ा हुआ है। राहुल गांधी ने कहा कि आज वोट की विश्वसनीयता खत्म हो गई है और कानून बनाने की व्यवस्था भी प्रभावित हुई है। अगर वोट चोरी हो गया है और उसके चलते कोई सांसद संसद में बैठा है, तो उसके द्वारा बनाए गए किसी भी कानून की वैधता पर सवाल खड़ा होता है। हमारे पास इसे निश्चित रूप से साबित करने के लिए पर्याप्त जानकारी है। इसके नतीजे होंगे। हम चुप नहीं बैठने वाले हैं। जो लोग इसके लिए जिम्मेदार हैं, उन्हें जवाबदेह ठहराया जाएगा। दो चुनाव आयुक्तों ने सही काम किया है, वे आगे आए और खुलकर अपनी बात रखी। ज्ञानेश कुमार को मेरी सलाह है कि वह सरकारी गवाह (अप्रूवर) बन जाएं। उन्हें पता है कि हम जानते हैं।
राहुल गांधी ने पीएम मोदी को घेरा
राहुल गांधी ने कहा कि एक ऐसा कानून पारित किया गया, जिसके तहत चुनाव आयुक्तों को जांच से संरक्षण मिल गया। दिसंबर 2023 में हमने महाराष्ट्र को लेकर एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी और उसमें विस्तृत सबूत पेश किए थे। मैंने भारत के प्रधानमंत्री को एक असहमति पत्र (डिसेंट नोट) सौंपा था, लेकिन मेरी बातों को नजरअंदाज कर दिया गया और प्रधानमंत्री ने इस व्यक्ति को चुनाव आयुक्त नियुक्त कर दिया।
