राहुल गांधी को नैतिक समर्थन और बीजेपी का विरोध, जानें- आप के लिए क्यों है जरूरी

  • Authored by: ललित राय
  • Updated Mar 25, 2023, 08:09 AM IST

सियासत अपनी दिशा खुद ब खुद बना लेती है। फैसले तो सिर्फ वजह बन जाते हैं। 10 से 12 साल पहले जिस कांग्रेस पार्टी की नीतियों की मुखालफत आम आदमी पार्टी किया करती थी, अब मानहानि जैसे मामले में राहुल गांधी को नैतिक समर्थन देते नजर आ रही है। आम आदमी पार्टी के नेता मानते हैं कि राष्ट्रीय फलक पर दमदार मौजूदगी के लिए बीजेपी के खिलाफ धारदार तरीके से लड़ना होगा।

KEY HIGHLIGHTS
  • राहुल गांधी के खिलाफ कार्रवाई को अरविंद केजरीवाल ने गलत बताया
  • राहुल गांधी मानहानि केस में सजा पाए जाने के बाद सांसदी के लिए अयोग्य
  • सूरत सेशंस कोर्ट के फैसले के बाद स्पीकर ने ठहराया अयोग्य

Arvind Kejriwal politics: आंदोलन के गर्भ से जन्मी पार्टी का नाम आम आदमी पार्टी है। भ्रष्टाचार के खिलाफ अलख जगाने वाले चेहरे का नाम है अरविंद केजरीवाल, करीब एक दशक पहले सत्ता का केंद्र दिल्ली आंदोलन का केंद्र बना। एक शख्स जंतर मंतर से आंदोलन की आगाज करता है और वो सफर रामलीला मैदान होते हुई सत्ता हासिल करने तक खत्म होने तक पहुंचती है। लेकिन लड़ाई अब आगे की है। 10-11 साल पहले लड़ाई कांग्रेस के खिलाफ थी। लेकिन अब जिस तरह से राजनीतिक घटनाक्रम हुए हैं उसके बाद सबसे बड़ा विरोध बीजेपी(aap agitation) के खिलाफ है। 23 मार्च को राहुल गांधी को मानहानि केस में जब सूरत सेशंस कोर्ट ने अयोग्य ठहराया तो अरविंद केजरीवाल खुलकर उनके समर्थन में आ गए। यही नहीं जब 24 मार्च को राहुल गांधी की सांसदी चली गई तो अरविंद केजरीवाल ने बीजेपी के नेताओं के दंभी तानाशाह, निरक्षर करार दिया।

arvind kejriwal pti

अरविंद केजरीवाल, आप के राष्ट्रीय संयोजक

कभी कांग्रेस के खिलाफ आंदोलन

याद करिए जब 2009-14 के बीत यूपीए-2 की सरकार थी और अरविंद केजरीवाल भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई लड़ रहे थे। तत्कालीन सरकार के लिए वो बड़ी चुनौती बने हुए थे। लेकिन एक दशक के बाद जब कांग्रेस जमीनी स्तर पर बेहद कमजोर पड़ चुकी है और बीजेपी के सितारे बुलंद हैं तो स्वाभाविक तौर अरविंद केजरीवाल और उनकी पार्टी को यकीन है कि उनके पास वो माद्दा है जिसकी मदद से वो बीजेपी के खिलाफ खुली लड़ाई जारी रख सकते हैं। जानकार कहते हैं कि सियासत में स्थाई रिश्ते फायदे तक सीमित रहते हैं। राजनीतिक दलों को लोगों की इच्छा आकांक्षाओं का ख्याल करते हुए पार्टी के विस्तार पर भी ध्यान देना होता है।

End of Feed