कांग्रेस नेता राहुल गांधी शुक्रवार को दिल्ली के संसद मार्ग थाने पहुंचे। जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के आंदोलन के दौरान पैलेट गन के इस्तेमाल को लेकर चल रही जांच की जानकारी लेने डीसीपी ऑफिस गए थे।
पैलेट गन मामले में थाने के बाहर धरने पर बैठे राहुल गांधी। Congress X handle
दरअसल, राहुल गांधी इस बात की जानकारी लेने पहुंचे थे कि इस मामले में जांच अब तक कहां तक पहुंची है और पुलिस की तरफ से क्या कार्रवाई की गई है। राहुल गांधी के साथ लेट गन पीड़ित साहिल लोहबच भी मौजूद थे। राहुल गांधी ने आरोप लगाया है कि इस मामले में एफआईआर दर्ज नहीं की गई है। वहीं, राहुल गांधी ने दिल्ली पुलिस के ज्वाइंट सीपी नुपुर प्रसाद से मुलाकात की। उन्हों कहा कि उन्हें चार्ज संभाले अभी एक-दो दिन ही हुए हैं इसके बाद राहुल गांधी थाने के बाहर धरने पर बैठ गए हैं। राहुल गांधी के समर्थन में जयराम रमेश, प्रियंका गांधी, सलमान खुर्शीद सहित कई नेता थाने पहुंचे।
दिल्ली पुलिस ने दर्ज की शिकायत
दिल्ली पुलिस के मुताबिक, दिल्ली पुलिस ने शिकायत ले ली है। और IO भी बता दिया है। राहुल गांधी को ये भी बता दिया गया है। पुलिस ने जानकारी दी कि सीजीपी प्रोटेस्ट के दौरान जो एफआईआर हुई थी उसकी जांच क्राइम ब्रांच कर रही है।
जब तक FIR दर्ज नहीं होती, तब तक हम पीछे नहीं हटेंगे: कांग्रेस
कांग्रेस की ओर से आरोप लगाया गया है कि पीड़ित साहिल लोचव ने 14 अगस्त को पुलिस को लिखित शिकायत दी थी, लेकिन पुलिस ने FIR दर्ज करना तो दूर, शिकायत का I/O नंबर तक उपलब्ध नहीं कराया। कांग्रेस के मुताबिक, साहिल ने 17 अगस्त को भी मामले में फॉलोअप किया, लेकिन पुलिस की ओर से ईमेल और फोन कॉल का जवाब नहीं दिया गया। इसके बाद आज लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी पीड़ित साहिल लोचव के साथ DCP कार्यालय के बाहर धरने पर बैठ गए।
कांग्रेस का आरोप है कि धरने के बावजूद DCP ने न तो जांच अधिकारी का नाम बताया और न ही एफआईआर दर्ज की। पार्टी ने इसे महज देरी नहीं, बल्कि न्याय से इनकार करार दिया है। राहुल गांधी और कांग्रेस की ओर से साफ कहा गया है कि जब तक FIR दर्ज नहीं होती, तब तक वे पीछे नहीं हटेंगे।
क्या है पूरा मामला?
कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेतृत्व में चल रहे आंदोलन के दौरान 20 जुलाई को संसद तक निकाले गए मार्च में पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प हो गई थी। इस दौरान प्रदर्शनकारियों पर कथित तौर पर पैलेट गन का इस्तेमाल किए जाने का आरोप लगा था। यह आंदोलन 20 जून को शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर शुरू हुआ था। धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद 25 जुलाई को आंदोलन समाप्त कर दिया गया।
मामले में अब सुप्रीम कोर्ट ने भी दखल दिया है। दिल्ली में हुए छात्र आंदोलन के दौरान पुलिस की कथित ज्यादती और पुलिसकर्मियों के खिलाफ हुई हिंसा की जांच के लिए कोर्ट ने पांच सदस्यीय हाई पावर्ड एन्क्वायरी कमेटी (HPEC) गठित की है। इस कमेटी की अध्यक्षता पूर्व सुप्रीम कोर्ट जज जस्टिस आर. सुभाष रेड्डी करेंगे। मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची व जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने 18 अगस्त को कमेटी गठित करने का आदेश दिया था, जिसे गुरुवार को अपलोड किया गया।
कमेटी में पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के पूर्व चीफ जस्टिस रवि शंकर झा, दिल्ली हाईकोर्ट की पूर्व जज जस्टिस शालिंदर कौर, CBI के पूर्व निदेशक ऋषि कुमार शुक्ला और मेघालय के रिटायर्ड DGP एल. आर. बिश्नोई शामिल हैं। कमेटी पैलेट गन के इस्तेमाल समेत पुलिस द्वारा कथित तौर पर किए गए अत्यधिक बल प्रयोग की जांच करेगी। इसके साथ ही आंदोलन के दौरान प्रदर्शनकारियों द्वारा पुलिसकर्मियों के साथ की गई हिंसा की भी जांच की जाएगी।
