Rahul Gandhi Attacks PM Modi: कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने पीएम नरेंद्र मोदी पर हमला बोला है। पीएम मोदी ने हाल ही में जनता से सोना ना खरीदने से लेकर कई अपील है। इसपर राहुल गांधी हमलावर है। उन्होंने कहाकि मोदी जी ने कल जनता से त्याग मांगे - सोना मत खरीदो, विदेश मत जाओ, पेट्रोल कम जलाओ, खाद और खाने का तेल कम करो, मेट्रो में चलो, घर से काम करो।
राहुल गांधी बोले- ये नाकामी के सबूत, अब देश चलाना PM के बस की बात नहीं, मोदी ने की है सोना ना खरीदने से लेकर जनता से कई अपील
कांग्रेस नेता ने कहा, 'ये उपदेश नहीं - ये नाकामी के सबूत हैं। 12 साल में देश को इस मुकाम पर ला दिया है कि जनता को बताना पड़ रहा है, क्या खरीदे, क्या न खरीदे, कहां जाए, कहां न जाए। हर बार जिम्मेदारी जनता पर डाल देते हैं ताकि खुद जवाबदेही से बच निकलें। देश चलाना अब Compromised PM के बस की बात नहीं।'
अखिलेश बोले- चुनाव खत्म होते ही, 'संकट' याद आ गया
सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने भी एक पोस्ट किया। उन्होंने लिखा, 'चुनाव खत्म होते ही, 'संकट' याद आ गया! दरअसल देश के लिए संकट सिर्फ एक है और उसका नाम है : भाजपा...इतनी सारी पाबंदियां लगानी पड़ीं तो 'पंच ट्रिलियन डॉलर की जुमलाई अर्थव्यवस्था' कैसे बनेगी? लगता है भाजपा सरकार के हाथ से लगाम पूरी तरह छूट गयी है। डॉलर आसमान छू रहा है और देश का रुपया पातालोन्मुखी हो गया है। '
यादव ने आगे कहा, 'सोना न खरीदने की अपील जनता से नहीं, भाजपाइयों को अपने भ्रष्ट लोगों से करनी चाहिए क्योंकि जनता तो वैसे भी 1.5 लाख तोले का सोना नहीं खरीद पा रही है। भाजपाई ही अपनी काली कमाई का स्वर्णीकरण करने में लगे हैं। हमारी बात गलत लग रही हो तो 'लखनऊ से लेकर गोरखपुर' तक पता कर लीजिए या 'अहमदाबाद से लेकर गुवाहाटी' तक।'
उन्होंने आगे कहा, 'वैसे सारी पाबंदियां चुनाव के बाद ही क्यों याद आईं है? भाजपाइयों ने चुनाव में जो हजारों चार्टर हवाई यात्राएं करीं वो क्या पानी से उड़ रहीं थीं? वो क्या होटलों में नहीं ठहर रहे थे या सिलेंडर की फोटो लगाकर खाना बनाकर खा रहे थे? भाजपाइयों ने चुनाव में ही वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से ही प्रचार क्यों नहीं किया? सारी पाबंदियां जनता के लिए ही हैं क्या? इस तरह की अपील से तो व्यापार-कारोबार-बाजार में मंदी या महंगाई की आशंका की वजह से डर के साथ घबराहट, बेचैनी, निराशा फैल जाएगी। सरकार का काम अपने अकूत संसाधनों का सदुपयोग करके आपातकालीन हालातों से उबारना होता है, भय या अफरातफरी फैलाना नहीं।'
यादव ने कहा, 'अगर सरकार नहीं चला पा रहे हैं तो भाजपाई अपनी नाकामी स्वीकार करें, देश को बर्बाद न करें। वैसे भी इन हालातों की असली वजह विदेश नीति के मामले में देश की परंपरागत 'गुट निरपेक्षता' की नीति से भाजपा सरकार का हटकर कुछ गुटों के पीछे, कुछ खास वजहों और दबावों की वजह से चलना है। इसका खामियाजा देश की जनता को महंगाई, बेरोजगारी, बेकारी और मंदी की मार के रूप में भुगतना पड़ रहा है। किसान-मजदूर से लेकर हर युवा, हर गृहिणी, नौकरीपेशा, पेशेवर, कारोबारी मतलब हर कोई इसकी चपेट में आ गया है। सच तो ये है कि भाजपा विदेश नीति और गृह नीति दोनों में फेल हो गयी है। ये अपील भाजपा सरकार की अपनी असफलता की स्वीकारोक्ति है। दरअसल वोट मिलते ही भाजपा का खोट सामने आ गया।'
उन्होंने आगे कहा कि भाजपाइयों ने चुनावी घपलों से राजनीति को प्रदूषित कर दिया है; नफरत फैला कर समाज के सौहार्द को बर्बाद कर दिया है; अपने चाल-चलन से भाजपाइयों ने संस्कृति-संस्कार को कलुषित कर दिया है; साधु-संतो पर प्रहार और आरोप लगाकर धर्म तक को नहीं छोड़ा है और अब अर्थव्यवस्था का रोना रो रहे हैं। इस तरह तो सांस्कृतिक, धार्मिक, राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक हर क्षेत्र में भाजपा ने देश का बंटाधार कर दिया है। इस अपील के बाद देश की जनता में अचानक आक्रोश का जो उबाल आया है, उसका प्रबंधन भाजपा किसी चुनावी-जुगाड़ की तरह नहीं कर पाएगी, अब भाजपा हमेशा के लिए जाएगी। देश कहे आज का, नहीं चाहिए भाजपा!
मोदी के किन बयानों से मचा हंगामा?
मोदी ने रविवार को कहा कि केंद्र सरकार लोगों को युद्ध के प्रतिकूल प्रभावों से बचाने के लिए प्रयास कर रही है और उन्होंने नागरिकों से चुनौतियों से पार पाने और देश की मदद करने के लिये कदम उठाने का आह्वान किया। भाजपा की तेलंगाना इकाई द्वारा यहां आयोजित एक रैली को संबोधित करते हुए मोदी ने विदेशी मुद्रा बचाने के लिए पेट्रोल और डीजल का विवेकपूर्ण उपयोग करने, शहरों में मेट्रो रेल सेवाओं का उपयोग, कार पूलिंग, इलेक्ट्रिक वाहनों का अधिकतम उपयोग, पार्सल भेजने के लिए रेल सेवाओं का उपयोग और घर से काम करने जैसे उपायों का सुझाव दिया।
मोदी ने कहा कि युद्ध के कारण पेट्रोल और उर्वरक की कीमतों में भारी वृद्धि हुई है। उन्होंने कहा कि जब आपूर्ति श्रृंखला पर दबाव होता है, तो संकट से निपटने के विभिन्न उपायों के बावजूद मुश्किलें बढ़ जाती हैं। उन्होंने कहा, 'इसीलिए, वैश्विक संकट के दौरान, देश को सर्वोपरि रखते हुए, हमें संकल्प लेने होंगे।'
उन्होंने कहा, 'इसीलिए, वैश्विक संकट के दौरान, देश को सर्वोपरि रखते हुए, हमें संकल्प लेने होंगे। उन्होंने कहा, 'हमने कोरोना काल में घर से काम करना, डिजिटल माध्यम से बैठक, वीडियो कॉन्फ्रेंस और कई अन्य तरीके विकसित किए हैं। हम इनके अभ्यस्त हो गए हैं। इस समय की आवश्यकता है कि हम इन तरीकों को फिर से शुरू करें।'
संकट के चलते विदेशी मुद्रा बचाने की आवश्यकता पर जोर देते हुए मोदी ने एक वर्ष के लिए सोने की खरीद और विदेश यात्राओं को स्थगित करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा, 'हमें हर हाल में विदेशी मुद्रा बचानी होगी।' उन्होंने विदेशी मुद्रा बचाने और देश को आत्मनिर्भर बनाने के लिए खाद्य तेल की खपत कम करने, रासायनिक उर्वरकों का उपयोग कम करने, प्राकृतिक खेती और स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा देने का भी आह्वान किया।
