प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की निंदा को लेकर इंटेलिजेंस ब्यूरो (आईबी) ने जिन अधिवक्ता आर जॉन सत्यन पर अंगुली उठाई थी, उन्हें सुप्रीम कोर्ट के कॉलेजियम ने एक बार फिर से हाईकोर्ट का जज बनाने के लिए कहा है। न्यायमूर्ति एस. के. कौल और न्यायमूर्ति के. एम. जोसेफ वाले इस कॉलेजियम ने सत्यन को मद्रास हाईकोर्ट का न्यायाधीश नियुक्त करने की अपनी 16 फरवरी, 2022 की सिफारिश को दोहराया है।
चीफ जस्टिस डी.वाई. चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाले कॉलेजियम की ओर से बताया गया कि इसने 17 जनवरी, 2023 को मीटिंग में अधिवक्ता सत्यन को मद्रास हाई कोर्ट के न्यायाधीश के रूप में नियुक्ति के लिए अपनी पहले की सिफारिश को दोहराया है। इंटेलिजेंस ब्यूरो (आईबी) ने सत्यन के सोशल मीडिया पोस्ट पर आपत्ति जताई। हालांकि, साथ ही यह भी कहा कि उनकी अच्छी निजी और पेशेवर छवि है और उनकी सत्यनिष्ठा के बारे में कुछ भी प्रतिकूल नहीं पाया गया। सत्यन ईसाई समुदाय से हैं।
आईबी की रिपोर्ट के मुताबिक, उनका कोई राजनीतिक झुकाव नहीं है। वहीं, सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट पर जारी स्टेटमेंट के अनुसार, ‘‘इस लिहाज से कॉलेजियम की यह सुविचारित राय है कि आर. जॉन सत्यन मद्रास हाईकोर्ट के न्यायाधीश के रूप में नियुक्त होने के लिए उपयुक्त हैं। कॉलेजियम उनकी नियुक्ति के लिए 16 फरवरी, 2022 की अपनी सिफारिश दोहराता है।’’
कॉलेजियम आगे बोला कि जब उसने पहली बार सत्यन को न्यायाधीश के रूप में प्रमोट करने की सिफारिश की तो सभी सलाहकार-न्यायाधीशों (न्यायमूर्ति संजय किशन कौल, न्यायमूर्ति इंदिरा बनर्जी (अब सेवानिवृत्त), न्यायमूर्ति वी. रामासुब्रमण्यम और न्यायमूर्ति एम.एम. सुंदरेश) ने उन्हें इस पद के लिए उपयुक्त पाया था।
"चारों की अभिव्यक्ति किसी उम्मीदवार को संवैधानिक पद पर आसीन होने से वंचित नहीं करती"
इस बीच, टॉप कोर्ट के कॉलेजियम ने कहा है कि न्यायपालिका के लिए प्रस्तावित उम्मीदवार की ओर से विचारों की अभिव्यक्ति उसे तब तक संवैधानिक पद पर आसीन होने से वंचित नहीं करती है जब तक कि उसके पास योग्यता और सत्यनिष्ठा है। अदालत की साइट पर अपलोडेड बयान के मुताबिक, ‘‘जिस आधार पर सुंदरेसन की उम्मीदवारी पर पुनर्विचार की मांग की गई है, वह यह है कि उन्होंने सोशल मीडिया में कई मामलों पर अपने विचार व्यक्त किए हैं, जो अदालतों के समक्ष चर्चा का विषय हैं।’’
आगे कहा गया, ‘‘सोमशेखर सुंदरेसन की उम्मीदवारी को लेकर आपत्ति पर विचार करने के बाद, कॉलेजियम का मत है कि उम्मीदवार के लिए सोशल मीडिया पर व्यक्त किये गये विचार, यह अनुमान लगाने के लिए कोई आधार प्रस्तुत नहीं करते हैं कि वह पक्षपाती हैं।’’ बताया गया कि सभी नागरिकों को संविधान के अनुच्छेद 19(1)(ए) के तहत बोलने और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार है। (पीटीआई-भाषा इनपुट्स के साथ)
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