Bhagwant Mann Viral Video: पंजाब में मुख्यमंत्री भगवंत मान से जुड़े एक तथाकथित वीडियो को लेकर सियासी पारा सातवें आसमान पर पहुंच गया है। यह विवाद अब इस कदर बढ़ चुका है कि शिरोमणि अकाली दल (SAD) ने मुख्यमंत्री के खिलाफ 'धर्म युद्ध मोर्चा' शुरू करने का बड़ा ऐलान कर दिया है, जबकि आम आदमी पार्टी (AAP) इसे सीएम को बदनाम करने की एक गहरी साजिश बता रही है। इस पूरे विवाद में 'आप' ने रक्षात्मक रुख अपनाते हुए वीडियो की जांच दो अलग-अलग फॉरेंसिक लैब से करवाई है।
मुख्यमंत्री के वीडियो विवाद पर पंजाब में आर-पार
रिपोर्ट का हवाला देते हुए सरकार ने दावा किया है कि वीडियो में दिखने वाला व्यक्ति मुख्यमंत्री भगवंत मान नहीं हैं। पार्टी का कहना है कि यह वीडियो पूरी तरह फर्जी है। मामले की गंभीरता को देखते हुए पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल चीमा और प्रदेश अध्यक्ष अमन अरोड़ा समेत कई विधायकों ने पुलिस महानिदेशक (DGP) से मुलाकात की और इस साजिश की पंजाब पुलिस से जांच कराने की मांग की।
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'वीडियो में मैं नहीं, मेरा हमशक्ल है'- भगवंत मान
खुद मुख्यमंत्री भगवंत मान ने भी इस फॉरेंसिक रिपोर्ट के आधार पर विरोधियों को घेरा है। सीएम ने कहा: "यह मुझे बदनाम करने की एक सुनियोजित साजिश है। वायरल वीडियो में मैं नहीं, बल्कि मेरे जैसा दिखने वाला कोई एक्टर (हमशक्ल) है। फॉरेंसिक जांच के दौरान वीडियो के 1191 फ्रेम चेक किए गए हैं, जिनमें से एक भी फ्रेम मुझसे मैच नहीं करता। मैंने डीजीपी को निर्देश दिए हैं कि इस साजिश के पीछे जो भी लोग हैं, उन्हें दुनिया के किसी भी कोने से ढूंढकर निकाला जाए।"
अकाली दल का 'धर्म युद्ध मोर्चा'
दूसरी तरफ, खुद को पंजाब की पंथक पार्टी कहने वाली शिरोमणि अकाली दल ने इस मुद्दे पर अपनी कोर कमेटी की आपात बैठक बुलाई। बैठक के बाद सुखबीर सिंह बादल (Sukhbir Badal) ने कड़ा रुख अपनाते हुए आम आदमी पार्टी को मुख्यमंत्री को पद से हटाने के लिए 19 जुलाई तक का अल्टीमेटम दिया है।
अकाली दल ने साफ किया है कि इस मुद्दे पर सभी धार्मिक, सामाजिक और राजनीतिक संगठनों को एकजुट करने के लिए उनकी पांच सदस्यीय कमेटी जल्द ही संत समाज से भी मुलाकात करेगी। सुखबीर सिंह बादल ने मांग की है कि अगर मुख्यमंत्री सच्चे हैं, तो वे 'लाई डिटेक्टर टेस्ट' करवाएं। साथ ही, उन्होंने ऐलान किया कि अकाली दल के विधायक तब तक विधानसभा नहीं जाएंगे जब तक मान सदन में मौजूद रहेंगे। अकाली दल ने पंजाब पुलिस के बजाय इस मामले की सीबीआई (CBI) जांच कराने की मांग उठाई है, क्योंकि पुलिस राज्य सरकार के अधीन काम करती है।
