तमिलनाडु के राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर ने गुरुवार को ET Now.in Realty Conclave & Awards 2026 South Edition कार्यक्रम में तमिलनाडु की सांस्कृतिक विरासत सहित कई अन्य मुद्दों पर खुलकर बात की। उन्होंने कहा कि किसी भी व्यवसाय की सफलता केवल मुनाफा कमाने से नहीं, बल्कि नैतिक मूल्य और सिद्धांत होने चाहिए।
राज्यपाल का पदभार संभालने के बाद अपने पहले सार्वजनिक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने भारतीय परंपरा के 'शुभ लाभ' और पश्चिमी सोच वाले 'शुद्ध लाभ' के बीच का अंतर स्पष्ट किया।
राज्यपाल के रूप में पहला सार्वजनिक कार्यक्रम
राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर ने बताया कि अधिसूचना जारी होने के दो दिन बाद वे तिरुवनंतपुरम से आए और आज ही उन्होंने तमिलनाडु के राज्यपाल का पदभार ग्रहण किया है। पदभार संभालने के बाद यह उनका पहला सार्वजनिक कार्यक्रम है, जिसे वे अपने लिए भी एक 'शुभ लाभ' मानते हैं। उन्होंने तमिलनाडु की समृद्ध सांस्कृतिक परंपरा की सराहना की और उम्मीद जताई कि यह राज्य पूरे देश के लिए एक अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत करेगा।
'विकास के साथ संस्कृति भी बचाएं'
रियल एस्टेट क्षेत्र का उल्लेख करते हुए राज्यपाल ने कहा कि जमीन और संपत्ति से जुड़ा कारोबार देशभर में तेजी से विस्तार कर रहा है। भारत का कोई भी नागरिक किसी भी राज्य में कारोबार करने के लिए स्वतंत्र है, लेकिन व्यावसायिक गतिविधियां नैतिक मूल्यों के अनुरूप होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि अनैतिक तरीकों से कमाया गया पैसा अल्पकालिक होता है, जबकि टिकाऊ विकास केवल नैतिक सिद्धांतों पर ही संभव है।
राज्यपाल ने शहरीकरण और ग्रामीण संस्कृति के बीच संतुलन बनाए रखने पर भी जोर दिया। साथ ही, उन्होंने आगाह किया कि शहरीकरण और विकास का अर्थ अंधाधुंध पश्चिमीकरण या ग्रामीण क्षेत्रों की सांस्कृतिक पहचान को नष्ट करना नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि चेन्नई जैसे बड़े शहरों में बढ़ती आबादी और बुनियादी ढांचे के दबाव के कारण शहरी विस्तार हो रहा है, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों के विकास या शहरीकरण का अर्थ वहां की ग्रामीण पहचान, नैतिकता और सांस्कृतिक मूल्यों को नष्ट करना नहीं होना चाहिए।
