प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच हुई मुलाकात पर विदेश मंत्रालय ने जानकारी देते हुए कहा कि दोनों नेताओं के बीच संबंध और बेहतर करने को लेकर चर्चा हुई। विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने दोनों देशों की दीर्घकालिक वृद्धि और विकास के लिए अपने दृष्टिकोण साझा किए। इस बातचीत के दौरान चीनी राष्ट्रपति ने पीएम मोदी के सामने चार सुझाव भी रखे, जिससे भारत-चीन के बीच संबंध और बेहतर हो सकते हैं।
पीएम मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग (फोटो- @narendramodi)
पीएम मोदी और जिनपिंग के बीच क्या हुई बात
विदेश सचिव मिसरी ने कहा कि मोदी और शी ने द्विपक्षीय संबंधों के अपने-अपने सिद्धांतों पर बात की, जिनसे भविष्य के कार्यों को दिशा देने में मदद मिलने की उम्मीद है। उन्होंने कहा कि इस बात पर आम सहमति बनी कि स्थिर और सौहार्दपूर्ण भारत-चीन संबंध दोनों देशों के 2.8 अरब लोगों को लाभान्वित कर सकते हैं। विदेश सचिव ने कहा कि राष्ट्रपति शी ने प्रधानमंत्री मोदी के साथ वार्ता के दौरान द्विपक्षीय संबंधों को और बेहतर बनाने के लिए चार सुझाव दिये।
BRICS के लिए पीएम मोदी ने जिनपिंग को दिया न्योता
प्रधानमंत्री मोदी की चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ द्विपक्षीय बैठक पर विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने कहा- "प्रधानमंत्री ने राष्ट्रपति शी को 2026 में भारत द्वारा आयोजित BRICS शिखर सम्मेलन में आमंत्रित किया। राष्ट्रपति शी ने निमंत्रण के लिए प्रधानमंत्री का धन्यवाद किया और भारत की BRICS अध्यक्षता के लिए चीन का पूर्ण समर्थन देने की पेशकश की।"
'मतभेदों को विवाद में नहीं बदलने देना चाहिए'
आगे विदेश सचिव ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने संबंधों के निरंतर और सुचारू विकास के लिए सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति और सौहार्द की आवश्यकता पर बल दिया। मोदी और शी का मानना था कि भारत और चीन के बीच मतभेदों को विवाद में नहीं बदलने देना चाहिए।
आतंकवाद पर भी हुई बात
विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने सीमा पार आतंकवाद के मुद्दे को "प्राथमिकता" बताया। मोदी और शी ने दिन में व्यापक चर्चा की, जिसमें द्विपक्षीय संबंधों को बहाल करने पर ध्यान केंद्रित किया गया। दोनों देशों के बीच संबंध पूर्वी लद्दाख में चार साल से अधिक समय से जारी सीमा गतिरोध के कारण तनावपूर्ण हो गए थे। मिसरी ने प्रेस वार्ता में कहा, ‘‘उन्होंने इस तथ्य को रेखांकित किया कि यह ऐसी चीज है जो भारत और चीन दोनों को प्रभावित करती है और इसलिए यह महत्वपूर्ण है कि हम एक-दूसरे को सहयोग प्रदान करें।’’ उन्होंने कहा, ‘‘और मैं कहूंगा कि हमें चीन का सहयोग प्राप्त हुआ है...।’’
