जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर ने अयोध्या स्थित राम मंदिर के प्रबंधन में कथित वित्तीय अनियमितताओं को लेकर केंद्र सरकार से श्वेत पत्र जारी करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि पूरे मामले में जवाबदेही तय होनी चाहिए और केवल नए मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) की नियुक्ति से पहले उठे सवाल खत्म नहीं हो जाते।
प्रशांत किशोर ने की श्वेत पत्र की मांग
गयाजी में शुक्रवार को पत्रकारों से बातचीत में प्रशांत किशोर ने कहा कि राम मंदिर करोड़ों लोगों की आस्था से जुड़ा विषय है। ऐसे में मंदिर के प्रबंधन में वित्तीय अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर पारदर्शिता जरूरी है। उन्होंने कहा, “अगर पहले से कामकाज संभाल रहे लोगों को बरी कर दिया जाए तो सिर्फ CEO नियुक्त करने से क्या हासिल होगा? भ्रष्टाचार के आरोपों ने लोगों की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाई है। सरकार को वित्तीय अनियमितताओं पर एक श्वेत पत्र जारी करना चाहिए।”
नए CEO की नियुक्ति पर भी उठाए सवाल
किशोर से श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के CEO के रूप में एयर मार्शल (सेवानिवृत्त) जीतेंद्र मिश्रा की नियुक्ति को लेकर भी सवाल किया गया। इसके जवाब में उन्होंने कहा कि नई नियुक्ति से ज्यादा जरूरी उन आरोपों की जांच और जवाबदेही तय करना है, जो मंदिर के प्रबंधन को लेकर पहले से सामने आते रहे हैं।GDP के आंकड़ों पर भी सरकार को घेरा
प्रशांत किशोर ने इस दौरान GDP वृद्धि दर को लेकर चल रहे विवाद पर भी अपनी राय रखी। पूर्व केंद्रीय वित्त सचिव श्रवण कुमार गर्ग की ओर से GDP के अनुमानित आंकड़ों पर सवाल उठाए जाने के संदर्भ में उन्होंने कहा कि आर्थिक आंकड़ों को लेकर विशेषज्ञों की आपत्तियों को गंभीरता से लिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह पहली बार नहीं है जब GDP वृद्धि दर को लेकर सरकार के दावों पर सवाल उठे हैं। किशोर के मुताबिक, अर्थव्यवस्था की वास्तविक स्थिति का आकलन केवल आंकड़ों से नहीं, बल्कि आम लोगों के जीवन में हो रहे बदलावों से भी किया जाना चाहिए।बिहार की राजनीति में बदलाव का दावा
जन सुराज पार्टी को लेकर प्रशांत किशोर ने कहा कि उनकी पार्टी बिहार में राजनीति करने के तरीके में बुनियादी बदलाव लाने के लिए प्रतिबद्ध है। हालांकि, उन्होंने यह भी माना कि राजनीतिक बदलाव के लिए केवल राजनीतिक दलों की कोशिश पर्याप्त नहीं होगी, बल्कि मतदाताओं की सोच में भी बदलाव जरूरी है। उन्होंने कहा कि जन सुराज के मुद्दों से सैद्धांतिक रूप से सहमत होने वाले कई लोग भी चुनाव के दौरान धार्मिक और जातिगत समीकरणों के आधार पर मतदान करते हैं।
कांग्रेस जैसी मुख्यधारा की पार्टियों के साथ गठबंधन की संभावना को लेकर प्रशांत किशोर पहले ही अपनी स्थिति स्पष्ट कर चुके हैं। उन्होंने कहा कि जन सुराज बिहार में अपने दम पर एक अलग राजनीतिक विकल्प तैयार करने की दिशा में काम कर रहा है।
शिक्षा को बताया बिहार के विकास की कुंजी
इस दौरान प्रशांत किशोर ने बिहार के पिछड़ेपन को दूर करने के लिए शिक्षा को सबसे महत्वपूर्ण क्षेत्र बताया। उन्होंने कहा कि राज्य को विकास की राह पर आगे बढ़ाने और देश के अग्रणी राज्यों में शामिल करने के लिए शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार आवश्यक है।उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले कुछ वर्षों में बिहार में शिक्षा को वह प्राथमिकता नहीं मिली, जिसकी उसे जरूरत थी।
प्रशांत किशोर ने कहा कि बिहार की लंबे समय से चली आ रही समस्याओं का समाधान केवल राजनीतिक नारों से नहीं होगा। इसके लिए शिक्षा, रोजगार, प्रशासन और लोगों की राजनीतिक सोच इन सभी क्षेत्रों में बदलाव की जरूरत है।
