Regime Change: राज्यसभा सांसद पवन खेड़ा ने बुधवार को केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि रिजीम चेंज लोकतांत्रिक देश में लोकतांत्रिक तरीके से होता है। उन्होंने पीएम मोदी के पुराने बयानों का हवाला देते हुए कहा कि वह पहले कहते थे कि उखाड़ फेकेंगे। इसका मतलब क्या होता है? चुनाव के जरिए उखाड़ फेकेंगे।
कांग्रेस सांसद पवन खेड़ा (फोटो साभार: Congress)
उन्होंने कहा कि 2012 में नरेंद्र मोदी ने दिल्ली की तत्कालीन सरकार को उखाड़ फेंकने की बात कही थी। ऐसे में अब जब विपक्ष सत्ता परिवर्तन की बात करता है, तो इसे अलग नजरिए से क्यों देखा जा रहा है? यह सिर्फ ध्यान भटकाने के लिए कोई शब्द पकड़ लेंगे और अगर कुछ नहीं मिला तो हिंदू-मुस्लिम करेंगे। इनका टूटकिट अब एक्सपोज हो गया है। अब इनके पास कुछ बचा नहीं है।
पवन खेड़ा ने आगे कहा कि रिजीम चेंज 1977, 1980, 1989 में हुआ और जब भी हुआ है तो चुनाव के जरिए ही हुआ है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में सड़क पर विरोध प्रदर्शन करना भी एक लोकतांत्रिक तरीका है।
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पवन खेड़ा ने मोदी सरकार पर कसा तंज
2012 में हुए अन्ना आंदोलन का जिक्र करते हुए कहा, ''उस समय भाजपा ने आंदोलन को बहुत हवा दी थी और अरुण जेटली मंच पर भी गए थे। भाजपा ने खुले तौर पर कहा था कि वे सरकार को हटाना चाहते हैं।'' उन्होंने तंज कसते कहा कि विपक्ष का यही तो काम है। मोदी जी क्या चाहते हैं कि विपक्ष ये कहें कि आप 10 साल और रहें। उन्होंने कहा, "हम तो ऐसा नहीं कहेंगे। हम तो कहेंगे कि दस दिन भी और मत रहो।"
विपक्ष का बढ़ रहा कुनबा
उन्होंने आगे कहा कि सरकार को घेरने के लिए महज एक मुद्दा थोड़ी है, बल्कि अनेक मुद्दे हैं और यह मुद्दे ऐसे हैं कि जनता खुद मुद्दे उठा रही है। उन्होंने कहा, ''विपक्ष का परिवार/कुनबा बढ़ रहा है और बहुत जल्द आपको और भी लोग दिखेंगे।''
