Chinmaya Amrit Mahotsav: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिल्ली में चिन्मय अमृत महोत्सव वैश्विक सम्मेलन का उद्घाटन किया उन्होंने कहा कि चिन्मय मिशन सिर्फ एक संस्था नहीं, बल्कि एक विचार है। मोदी ने नई दिल्ली के भारत मंडपम में 'चिन्मय अमृत महोत्सव ग्लोबल सम्मेलन' में शामिल होने पर आभार व्यक्त किया। प्रधानमंत्री ने कहा कि चिन्मय मिशन ने दशकों से समुदायों की सेवा करने और भारत के आध्यात्मिक ज्ञान को पूरी दुनिया तक पहुंचाने का काम किया है।
पीएम मोदी ने 'चिन्मय अमृत महोत्सव' का किया उद्घाटन, बोले- 'हमारा राष्ट्र हमारी संस्कृति की जन्मभूमि, यही राष्ट्र हमारा अस्तित्व'
'Holo Watts' के जरिए महसूस हुआ 33 साल पुराना संस्मरण
कार्यक्रम के दौरान आधुनिक टेक्नोलॉजी का एक अनूठा रूप देखने को मिला। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि आधुनिक तकनीक के जरिए पूज्य गुरुदेव स्वामी चिन्मयानंद जी के दर्शन और उनके 'Holo Watts' से संवाद करने का जो सौभाग्य मिला, उससे उन्हें ऐसा लगा मानो वे 33 वर्ष पीछे पहुंच गए हों।
1993 की यादें: पीएम मोदी ने संस्मरण साझा करते हुए बताया कि उन्होंने 1993 में गुरुदेव जी से मुलाकात की थी और उन्हें अमेरिका के शिकागो में होने वाली 'विश्व धर्म संसद' के शताब्दी समारोह के लिए आमंत्रित किया था।
स्वामी चिन्मयानंद ने निमंत्रण स्वीकार किया और अमेरिका की यात्रा करने वाले थे, लेकिन दुर्भाग्य से आयोजन से ठीक दो हफ्ते पहले 3 अगस्त को सैन डिएगो में उनका महाप्रयाण हो गया। 11 सितंबर को जब संसद आयोजित हुई, तो सभी ने गुरुदेव जी को गहराई से याद किया।
पीएम मोदी के संबोधन की मुख्य बातें
चिन्मय विचार और अमर चेतना: प्रधानमंत्री ने कहा, 'आप सभी के सौजन्य से आज मुझे चिन्मय मिशन के अमृत महोत्सव में शामिल होने का अवसर मिला है। चिन्मय मिशन केवल एक संस्था नहीं है, ये एक 'चिन्मय विचार' है। हमारे उपनिषदों का कथन है 'वयं अमृतस्य पुत्राः', अर्थात हम अमृत की संतान हैं। हमारी चेतना, ज्ञान और बोध अमर है, और इसी बोध के कारण भारत हजारों वर्षों से अमर बना हुआ है।'
राष्ट्र प्रथम और सांस्कृतिक राजदूत: पीएम ने कहा कि स्वामी चिन्मयानंद ने अपना पूरा जीवन राष्ट्र को जागृत करने के लिए जिया। वे जितनी श्रद्धा से आध्यात्मिक विषयों पर बोलते थे, उतनी ही तत्परता से राष्ट्र के विषयों पर भी मुखर रहते थे। आज चिन्मय मिशन के प्रयासों से लाखों युवा भारत के सांस्कृतिक ब्रांड एंबेसडर की तरह काम कर रहे हैं और भारतीय मूल्यों को आगे बढ़ा रहे हैं।
2047 के विकसित भारत का संकल्प: देश के सामने मौजूद नई चुनौतियों और विकृतियों का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने आह्वान किया कि हमें बांटने वाली ताकतों के खिलाफ समाज को एकजुट करना है, आत्मनिर्भरता के लिए देशवासियों को जागरूक करना है और 2047 के 'विकसित भारत' के संकल्प से जन-जन को जोड़ना है।
