प्रधानमंत्री शेख हसीना को पद से हटाने के बाद बांग्लादेश में पहली बार हुए आम चुनाव में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) ने बड़ी जीत हासिल की है। जिसके बाद कल बीएनपी प्रमुख और पूर्व पीएम खालिदा जिया के बेटे तारिक रहमान कल प्रधानमंत्री पद की शपथ ले सकते हैं। बीएनपी की जीत के बाद पीएम मोदी ने बीएनपी प्रमुख तारिक रहमान से बात कर उन्हें जीत की बधाई दी है। पीएम मोदी ने इस बारे में अपने आधिकारिक एक्स अकाउंट पर पोस्ट किया है।
पीएम मोदी ने बांग्लादेश आम चुनाव में जीत के लिए बीएनपी नेता को दी जीत की बधाई।
पीएम मोदी ने तारिक रहमान को दी जीत पर बधाई
अपनी पोस्ट में पीएम मोदी ने लिखा, 'तारिक रहमान से बात करके मुझे बहुत खुशी हुई। मैंने उन्हें बांग्लादेश चुनावों में उनकी शानदार जीत पर बधाई दी। मैंने बांग्लादेश की जनता की आकांक्षाओं को पूरा करने के उनके प्रयासों में अपनी शुभकामनाएं और समर्थन व्यक्त किया। गहरे ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंधों वाले दो करीबी पड़ोसी होने के नाते, मैंने दोनों देशों की जनता की शांति, प्रगति और समृद्धि के प्रति भारत की निरंतर प्रतिबद्धता को दोहराया।'
बीएनपी का ऐतिहासिक प्रदर्शन
बांग्लादेश में सत्ता को लेकर करीब 18 महीनों तक चले राजनीतिक तनाव और खींचतान के बाद आखिरकार चुनाव संपन्न हो गए। चुनाव नतीजों में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) ने जबरदस्त प्रदर्शन करते हुए स्पष्ट बढ़त हासिल की है। मतगणना के ताज़ा आंकड़ों के मुताबिक, बीएनपी को दो-तिहाई से अधिक सीटों पर जीत मिली है। इसके मुकाबले जमात-ए-इस्लामी के नेतृत्व वाले गठबंधन को अब तक सिर्फ 73 सीटों पर ही संतोष करना पड़ा है।
299 सीटों पर हुआ था मतदान
बांग्लादेश की राष्ट्रीय संसद, जिसे जातीय संसद कहा जाता है, में कुल 300 सीटें होती हैं। इस बार 299 सीटों पर मतदान कराया गया, जबकि शेरपुर-3 सीट पर उम्मीदवार के निधन के चलते चुनाव स्थगित कर दिया गया। संसद में सरकार बनाने के लिए कम से कम 150 सीटों का बहुमत जरूरी होता है। इसके अलावा 50 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित हैं, जिनका आवंटन 300 सामान्य सीटों पर पार्टियों के प्रदर्शन के अनुपात में किया जाता है।
बांग्लादेश के नए पीएम बन सकते हैं तारिक
तारिक रहमान पिछले 17 सालों से देश से बाहर निर्वासित जिंदगी जी रहे थे और अब वो प्रधानमंत्री बनने वाले हैं। उन्होंने देश में कानून का राज बहाल करने और गारमेंट्स सेक्टर में नई जान फूंकने पर फोकस करते हुए एक "नया रास्ता" अपनाने का वादा किया है। वहीं, जमात-ए-इस्लामी ने जीत हासिल करने के लिए पूरी जान झोंक दी थी, लेकिन जैसा की नवभारत टाइम्स की आकलन रिपोर्ट में भी पता चला था, जमात सरकार बनाने की स्थिति में नहीं आने वाली थी।
