प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को ब्राजील के राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला दा सिल्वा से बात की और वैश्विक दक्षिण के साझा हितों को आगे बढ़ाने के लिए घनिष्ठ सहयोग को अत्यंत महत्वपूर्ण बताया। प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि वे जल्द ही ब्राजील के राष्ट्रपति का भारत में स्वागत करने के लिए उत्सुक हैं। पीएम मोदी ने X पर एक पोस्ट में कहा, राष्ट्रपति लूला से बात करके खुशी हुई। हमने भारत-ब्राजील रणनीतिक साझेदारी की मजबूत प्रगति की समीक्षा की, जो आने वाले वर्ष में नई ऊंचाइयों को छूने के लिए तैयार है। वैश्विक दक्षिण के साझा हितों को आगे बढ़ाने के लिए हमारा घनिष्ठ सहयोग अत्यंत महत्वपूर्ण है। मैं जल्द ही उनका भारत में स्वागत करने के लिए उत्सुक हूं।
पीएम मोदी ने की ब्राजील के राष्ट्रपति से बात
ट्रंप ने 'शांति बोर्ड' का किया अनावरण, भारत रहा अनुपस्थित
दोनों नेताओं की बात ऐसे वक्त पर हुई है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गाजा में स्थायी शांति स्थापित करने और संभवत: वैश्विक संघर्षों का समाधान करने की दिशा में काम करने के लिए प्रस्तावित ‘शांति बोर्ड’ का स्विट्जरलैंड के दावोस में औपचारिक रूप से अनावरण किया, लेकिन भारत इस मौके पर अनुपस्थित रहा। प्रधानमंत्री मोदी उन कई वैश्विक नेताओं में शामिल थे जिन्हें अमेरिकी राष्ट्रपति ने गाजा पट्टी में इजराइल और हमास के बीच युद्धविराम समझौते के दूसरे चरण के तहत घोषित बोर्ड में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया था।
ट्रंप ने स्विट्जरलैंड के दावोस स्थित पहाड़ी रिसॉर्ट में आयोजित वार्षिक विश्व आर्थिक मंच के इतर इस समारोह की मेजबानी की। ट्रंप ने अनावरण समारोह को संबोधित करते हुए इस बोर्ड को दुनिया के लिए एक बेहद अनोखी पहल बताया। उन्होंने बोर्ड के घोषणापत्र पर हस्ताक्षर के लिए आयोजित समारोह में कहा, यह बोर्ड संयुक्त राष्ट्र के साथ मिलकर न केवल पश्चिम एशिया में, बल्कि अन्य जगहों पर भी युद्धों को सुलझाने में मदद कर सकता है। हालांकि उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि बोर्ड संयुक्त राष्ट्र के साथ किस प्रकार सहयोग करेगा।
भारत ने अब तक इस पर कोई फैसला नहीं लिया
पूरे घटनाक्रम की जानकारी रखने वाले लोगों ने प्रधानमंत्री मोदी को ट्रंप के निमंत्रण के बारे में पूछे जाने पर कहा कि भारत ने अब तक इस पर कोई फैसला नहीं लिया है। उन्होंने बताया कि भारत इस पहल के विभिन्न पहलुओं पर विचार कर रहा है क्योंकि इसमें कई संवेदनशील मुद्दे शामिल हैं। भारत फलस्तीन मुद्दे के लिए ‘दो-राष्ट्र समाधान’ पर जोर दे रहा है, जिसमें इजराइल और फलस्तीन मान्यता प्राप्त सीमाओं के भीतर शांति और सुरक्षा के साथ अगल-बगल रहें।
‘शांति बोर्ड’ में शामिल करने के लिए दिए गए आमंत्रण को अर्जेंटीना, अल्बानिया, अर्मेनिया, अजरबैजान, बहरीन, बेलारूस, बुल्गारिया, मिस्र, हंगरी, इंडोनेशिया, जॉर्डन, कजाखिस्तान, कोसोवो, मोरक्को, मंगोलिया, पाकिस्तान, कतर, सऊदी अरब, तुर्की, संयुक्त अरब अमीरात, उज्बेकिस्तान और वियतनाम ने स्वीकार किया है।
फ्रांस, नॉर्वे, स्लोवेनिया, स्वीडन और ब्रिटेन उन देशों में शामिल हैं जो कम से कम अभी के लिए बोर्ड में शामिल नहीं होंगे। ट्रंप द्वारा आमंत्रित लेकिन अब तक कोई प्रतिबद्धता नहीं जताने वाले देशों में कंबोडिया, चीन, क्रोएशिया, साइप्रस, यूनान, इटली, पैराग्वे, रूस, सिंगापुर, थाईलैंड और यूक्रेन शामिल हैं। ट्रंप ने कहा, यह केवल अमेरिका के लिए नहीं है, यह पूरी दुनिया के लिए है। मुझे लगता है कि गाजा में सफलता मिलने के बाद हम इसे अन्य क्षेत्रों में भी लागू कर सकते हैं। समारोह में उपस्थित नेताओं में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ भी शामिल थे।
