PM Modi South India Visit: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सुबह केरल की राजधानी तिरुवनंतपुरम पहुंचे। एयरपोर्ट से पुथरिकांडम मैदान तक हुए रोड शो के जरिए उन्होंने जनता से सीधा संवाद किया। तिरुवनंतपुरम में हाल में हुए निकाय चुनाव में भाजपा की जीत के बाद यह राजधानी में उनकी पहली यात्रा मानी जा रही है। इस दौरान पीएम मोदी ने ‘विकसित अनंतपुरी’ योजना की शुरुआत की, जिसके तहत साल 2030 तक शहर के समग्र विकास का ब्लूप्रिंट तैयार किया गया है। प्रधानमंत्री ने इंफ्रास्ट्रक्चर, कनेक्टिविटी और रोजगार के नए अवसरों पर जोर देते हुए कहा कि तिरुवनंतपुरम बदलते केरल की आकांक्षाओं का प्रतीक बन रहा है। उन्होंने दावा किया कि नई परियोजनाएं राज्य के शहरी ढांचे को मजबूत करेंगी और युवाओं के लिए अवसर पैदा करेंगी।
दक्षिण का सियासी समर
तमिलनाडु में एनडीए का शक्ति प्रदर्शन
केरल के बाद प्रधानमंत्री तमिलनाडु पहुंचे, जहां उन्होंने चेन्नई से सटे मदुरंतकम में विशाल जनसभा को संबोधित किया। उत्तर तमिलनाडु का यह इलाका डीएमके का मजबूत गढ़ माना जाता है, ऐसे में पीएम मोदी की रैली को एनडीए की सीधी सियासी चुनौती के तौर पर देखा जा रहा है। रैली से पहले एनडीए को उस वक्त बड़ा राजनीतिक बढ़ावा मिला जब एएमएमके प्रमुख टीटीवी दिनाकरन ने एनडीए में वापसी का ऐलान किया। बीजेपी, डीएमडीके और ओपीएस गुट को भी साथ लाने की रणनीति पर काम कर रही है।
कौन करेगा तमिलनाडु में एनडीए का नेतृत्व?
गठबंधन की ओर से यह साफ किया गया है कि तमिलनाडु में एनडीए का नेतृत्व एआईएडीएमके करेगी। रैली को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि तमिलनाडु की जनता एनडीए के साथ है और राज्य में अब “भ्रष्ट डीएमके सरकार को विदा करने का समय आ गया है।” उन्होंने दावा किया कि सुशासन और क्षेत्रीय विकास के प्रति एनडीए की प्रतिबद्धता जनता को आकर्षित कर रही है।
विपक्ष का पलटवार
प्रधानमंत्री के बयानों पर विपक्षी दलों ने कड़ा पलटवार किया है। डीएमके और अन्य विपक्षी दलों का कहना है कि बीजेपी दक्षिण भारत में राजनीतिक विस्तार की कोशिश कर रही है, लेकिन जमीनी सच्चाई यह है कि जनता केंद्र सरकार की नीतियों से संतुष्ट नहीं है। विपक्ष का आरोप है कि विकास के नाम पर राजनीतिक एजेंडा चलाया जा रहा है और बीजेपी सांस्कृतिक विविधता, संघीय ढांचे और राज्यों के अधिकारों की अनदेखी कर रही है। डीएमके प्रवक्ता सरवनन अन्नादुरई ने दावा किया कि केरल और तमिलनाडु की जनता पहले भी बीजेपी को नकार चुकी है और आगे भी यही रुख देखने को मिलेगा।
दक्षिण भारत में चुनावी तापमान तेज
कुल मिलाकर पीएम मोदी के इस दौरे ने दक्षिण भारत की राजनीति में चुनावी गर्मी बढ़ा दी है। केरल में जहां एलडीएफ और यूडीएफ के बीच सीधा मुकाबला है और बीजेपी शहरी राजनीति के सहारे अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रही है, वहीं तमिलनाडु में डीएमके सत्ता में मजबूत स्थिति में है। एनडीए, एआईएडीएमके के नेतृत्व में गठबंधन को मजबूत कर सत्ता वापसी की रणनीति पर आगे बढ़ रहा है। साफ है कि इस बार केरल और तमिलनाडु दोनों राज्यों में चुनावी मुकाबला बेहद दिलचस्प और कड़ा होने वाला है।
