बिहार वोटर लिस्ट रिवीजन के समर्थन में अर्जी दाखिल, फर्जी वोटिंग रोकने के लिए सुप्रीम कोर्ट से की ये मांग

देश भर के तमाम विपक्षी दलों ने बिहार में चल रहे मतदाता सूची पुनरीक्षण के खिलाफ मोर्चा खोल रहा है वहीं अश्विनी कुमार उपाध्याय ने इसके समर्थन में सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है।

नई दिल्ली: जहां एक तरह देश भर के तमाम विपक्षी दलों ने बिहार में चल रहे मतदाता सूची पुनरीक्षण के खिलाफ मोर्चा खोल रहा है वहीं अश्विनी कुमार उपाध्याय ने इसके समर्थन में सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। जिसमें उन्होंने चुनाव आयोग को यह निर्देश देने की मांग की है कि लोकसभा, विधानसभा और स्थानीय निकाय चुनावों से पहले पूरे देश में मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR)किया जाए। उनका कहना है कि यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि केवल भारतीय नागरिक ही देश की नीतियों पर फैसला करें, न कि विदेशी घुसपैठिए।

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बिहार वोटर लिस्ट रिवीजन के समर्थन में अर्जी दाखिल - (फोटो साभार - (https://www.sci.gov.in/hi/)

याचिका में क्या क्या कहा गया?

अश्विनी उपाध्याय ने याचिका में दावा किया है कि देश के 200 जिलों और 1500 तहसीलों की डेमोग्राफी में देश की आजादी के बाद अवैध घुसपैठ, धर्मांतरण और जनसंख्या विस्फोट के कारण बड़ा बदलाव आया है। याचिकाकर्ता का कहना है कि अवैध विदेशी नागरिकों को वोटर लिस्ट में शामिल होने से न केवल भारतीय मतदाताओं की आवाज कमजोर होती है बल्कि यह देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा भी बनता है।उन्होंने यह भी कहा कि बिहार जैसे राज्य जहां चुनाव होना है, वहां लगभग हर विधानसभा क्षेत्र में औसतन 8 से 10 हजार फर्जी, दो बार शामिल या मृत लोगों के नाम हैं।

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