बाबा रामदेव ने पतंजलि के घी की गुणवत्ता को लेकर उठ रहे सवालों पर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने एक प्रेस कांफ्रेंस कर आरोपों को गलत बताते हुए कहा कि पतंजलि का घी किसी भी लैब टेस्ट में फेल नहीं हुआ है। रामदेव ने लोगों को चुनौती देते हुए कहा कि वे चाहें तो पतंजलि का घी लेकर खुद लैब में इसकी जांच करा सकते हैं। उन्होंने कहा कि पहली बार लोगों को गाय का घी उपहार के रूप में दिया जा रहा है और लोग दो-दो डिब्बे ले जा सकते हैं।
योग गुरु बाबा रामदेव। (फाइल)
रामदेव ने दावा किया कि पतंजलि का घी दुनिया के दो दर्जन से ज्यादा देशों में निर्यात किया जाता है। उन्होंने घी में मिलावट के आरोपों को भी खारिज किया। उन्होंने कहा कि पतंजलि घी में जानवरों की चर्बी, हड्डियों से निकला पदार्थ, वनस्पति तेल या वनस्पति घी मिलाने का सवाल ही नहीं है। साथ ही इसमें किसी तरह के फ्रेगरेंस या फ्लेवर का भी इस्तेमाल नहीं किया जाता है।
अमूल और मदर डेयरी का भी किया जिक्र
घी की कीमत को लेकर रामदेव ने कहा कि पतंजलि घी को सस्ता बताकर गलत गणना की जाती है। उन्होंने कहा कि पतंजलि का घी अमूल, मदर डेयरी और नंदिनी के घी से महंगा है। साथ ही पतंजलि के घी को लेकर जिस तरह के सवाल उठाए जाते हैं, वैसी जांच या चुनौती दूसरी कंपनियों के घी को लेकर नहीं होती।रामदेव ने RM जैसे मानकों का जिक्र करते हुए कहा कि पतंजलि घी FSSAI के मानकों के अनुरूप है। उन्होंने देश में गोवंश से जुड़े आंकड़ों का भी उल्लेख किया। उनके मुताबिक देश में करीब 19 करोड़ गोवंश है, जिसमें लगभग 14 करोड़ देशी और करीब पांच करोड़ संकर नस्ल का है। रामदेव ने कहा कि ये आंकड़े भारत सरकार के पशुपालन एवं डेयरी मंत्रालय के डेटा पर आधारित हैं।
बृजभूषण शरण सिंह को लेकर ये बोले रामदेव
इस दौरान बाबा रामदेव ने पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह से हुई मुलाकात का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि कुछ सुनी-सुनाई बातों या वीडियो के आधार पर बृजभूषण सिंह के मन में कुछ गलतफहमी पैदा हो गई थी। मुलाकात के दौरान उन्होंने पूरे मामले का पटाक्षेप कर दिया। रामदेव ने कहा कि वह बृजभूषण सिंह के इस कदम के लिए उनका हृदय से धन्यवाद करते हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी वजह से अगर किसी व्यक्ति के मन में गलतफहमी पैदा हो जाए तो उसे दूर करना उसका विवेक और जिम्मेदारी होनी चाहिए।रामदेव ने बताया कि बृजभूषण सिंह ने मुलाकात के दौरान संतों और सनातन के प्रति सम्मान की बात कही। साथ ही उन्होंने देश के लिए किए जा रहे रामदेव के कार्यों को भी सम्मान देने की बात कही। इस दौरान बाबा रामदेव ने आचार्य विल्भुषण जी का भी जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने उनसे मुलाकात कर संतों और सनातन के प्रति सम्मान की बात कही है।रामदेव ने कहा कि अब इस विवाद को उनकी ओर से भी खत्म किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि साधु बनने का उद्देश्य विवाद को बढ़ाना नहीं, बल्कि उसे खत्म करना है।
अपने संन्यासी जीवन और संपत्ति पर क्या बोले?
रामदेव ने कहा कि उनके रग-रग में भारत माता की सेवा का संकल्प है और वह अंतिम सांस तक देश सेवा करेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने अपने पास पतंजलि का गाय का घी या पतंजलि की कोई दवाई नहीं रखी है। अपने संन्यासी जीवन का जिक्र करते हुए रामदेव ने कहा कि उन्होंने संन्यास नशे या भोग के लिए नहीं लिया। उन्होंने खुद को ब्रह्मचर्य और पवित्रता के साथ संन्यासी जीवन जीने वाला बताया।पतंजलि के प्रमुख रामदेव ने दावा किया कि उनके नाम पर एक इंच जमीन और कोई बैंक बैलेंस नहीं है। उन्होंने कहा कि आज उनके पास जो कुछ है,वह भगवान और गुरु का दिया हुआ है। उन्होंने कहा कि वह आज भी जमीन पर चटाई बिछाकर सोते हैं।
आयुर्वेद को लेकर भी किए कई दावे
बाबा रामदेव ने इस दौरान आयुर्वेद को लेकर भी किए कई दावे किए। साथ ही उन दावों को भी गलत बताया,जिनमें कहा जाता है कि उनकी 14 दवाइयों को सुप्रीम कोर्ट ने प्रतिबंधित कर दिया है। उनका कहना था कि इन 14 दवाइयों पर कभी प्रतिबंध नहीं था,न है और न ही ऐसा हो सकता है।पतंजलि रिसर्च फाउंडेशन को लेकर किया ये दावा
आयुर्वेद को उन्होंने 'बहुत बड़ी साइंस' बताते हुए कहा कि विश्व आयुर्वेद दिवस पर उनका संकल्प इसे दुनिया में मुख्यधारा की चिकित्सा पद्धति के रूप में स्थापित करने का है। उन्होंने पतंजलि रिसर्च फाउंडेशन में 10 हजार से ज्यादा रिसर्च प्रोटोकॉल और 1,100 से अधिक जड़ी-बूटियों के फिंगरप्रिंट तैयार करने का दावा किया। रामदेव ने लिवर, किडनी, लंग और हार्ट फेलियर जैसी गंभीर बीमारियों के इलाज के साथ कैंसर जैसी बीमारियों को 'रिवर्स' करने वाली दवाइयां होने का भी दावा किया। उन्होंने मोटापा, ब्लड प्रेशर, शुगर, थायराइड, लिवर, किडनी और हार्ट से जुड़ी बीमारियों को रिवर्स करने तथा शरीर के कई अंगों की कोशिकाओं को रिजुविनेट करने की बात कही।
मॉडर्न मेडिकल साइंस पर उठाए सवाल
इस दौरान बाबा रामदेव ने मॉडर्न मेडिकल साइंस पर भी सवाल उठाए। साथ ही कहा कि कई ऐसी बीमारियां हैं, जिनको जड़ से खत्म करने में मॉडर्न मेडिकल साइंस की सीमाएं आड़े आती हैं। इस दौरान उन्होंने 'ड्रग एंड मैजिक रेमेडीज एक्ट' में संशोधन की मांग की और इसे आयुर्वेद के लिए बाधा बताया।
