Parliament special session 2026: संसद का विशेष सत्र आज से शुरू हो गया है, जो अगले तीन दिनों तक चलेगा। इस सत्र में सरकार कई अहम विधेयक पेश करने की तैयारी में है, जिनका सीधा असर देश की चुनावी व्यवस्था और प्रतिनिधित्व प्रणाली पर पड़ सकता है। इनमें संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026, परिसीमन विधेयक, 2026 और केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक, 2026 शामिल हैं।
अमित शाह बोले- धर्म के आधार पर आरक्षण मंजूर नहीं (Photo: ANI)
समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव ने इसे पीडीए (पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक) समुदाय को कमजोर करने की कोशिश बताया है। उन्होंने कहा कि यह बिल दलित, पिछड़ा और मुस्लिम विरोधी है, हालांकि उनकी पार्टी महिला आरक्षण (women reservation bill) का समर्थन करती है। विपक्ष ने यह भी सवाल उठाया कि सरकार समय पर जनगणना क्यों नहीं करा रही है? कांग्रेस ने भी आरोप लगाया कि यह विधेयक चुनावी फायदे के लिए लाया गया है। वहीं सपा ने मुस्लिम महिलाओं के लिए अलग से आरक्षण की मांग रखी है, जिसे लेकर सरकार ने साफ किया है कि धर्म के आधार पर आरक्षण देना असंवैधानिक है।
अखिलेश यादव के सवाल का अमित शाह ने दिया जवाब
सदन में इस मुद्दे पर चर्चा के दौरान गृह मंत्री अमित शाह ने विपक्ष और अखिलेश यादव के सवालों का जवाब दिया। उन्होंने कहा कि जनगणना की प्रक्रिया पहले ही शुरू हो चुकी है और इसमें जातिगत जनगणना भी शामिल है। अखिलेश यादव के मुस्लिम महिलाओं पर आरक्षण देने की बात पर अमित शाह बोले कि धर्म के आधार पर आरक्षण देना संविधान के खिलाफ है और इसे स्वीकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि सरकार सभी सवालों का जवाब देगी। वहीं विपक्ष ने इस विधेयक पर अलग रुख अपनाया है। संसद का यह विशेष सत्र महिला आरक्षण, परिसीमन और जनगणना जैसे बड़े मुद्दों पर केंद्रित है। इस पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस जारी है और देशभर की नजरें इस चर्चा पर टिकी हुई हैं।
लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देना
सरकार का कहना है कि इन विधेयकों का मुख्य उद्देश्य महिलाओं (mahila aarakshan bill kya hai) को लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में 33 प्रतिशत आरक्षण देना है। इसके साथ ही नए परिसीमन के आधार पर लोकसभा सीटों का पुनर्गठन किया जाएगा और संसद में सदस्यों की संख्या में भी बदलाव संभव है। महिला आरक्षण से जुड़ा कानून वर्ष 2023 में पारित हो चुका है, लेकिन अभी तक लागू नहीं हो पाया था क्योंकि इसे परिसीमन प्रक्रिया से जोड़ा गया था। अब सरकार का लक्ष्य है कि इसे 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले लागू किया जाए।
