महामना पंडित मदन मोहन मालवीय की 162वीं जयंती के अवसर पर पीएम मोदी ने एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि उनकी सरकार के कार्यों में महामना के विचारों की महक लोगों को मिलती होगी। इस दौरान पीएम मोदी न पंडित मदन मोहन मालवीय की संकलित रचनाओं के 11 खंडों की प्रथम श्रृंखला का विमोचन भी किया। उन्होंने कहा कि महामना जैसे व्यक्तित्व सदियों में एक बार जन्म लेते हैं।
महामना मालवीय की 162वीं जयंती के अवसर पर कार्यक्रम को संबोधित करते हुए पीएम मोदी
'महामना के लिए राष्ट्र सर्वोपरि'
विज्ञान भवन में आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि महामना जैसे व्यक्तित्व सदियों में एक बार जन्म लेते हैं और आने वाली कई सदियां उनसे प्रभावित होती है। भारत की कितनी ही पीढ़ियों पर महामना का ऋण है। वो आधुनिक सोच और सनातन संस्कारों के संगम थे। महामना जिस भूमिका में रहे, उन्होंने 'राष्ट्र प्रथम' के संकल्प को सर्वोपरि रखा। वो देश के लिए बड़ी से बड़ी ताकत से टकराए। मुश्किल से मुश्किल माहौल में भी उन्होंने देश के लिए संभावनाओं के नए बीज बोए।
पीएम मोदी ने बताए संबंध
आजादी के अमृतकाल में गुलामी की मानसिकता से मुक्ति पाने और अपनी विरासत पर गर्व करने के सरकार के अभियान का उल्लेख करते हुए मोदी ने कहा कि उनकी सरकार के कार्यों में भी कहीं न कहीं पंडित मालवीय के विचारों की महक महसूस होगी। प्रधानमंत्री ने कहा कि उनके लिए पंडित मालवीय एक और वजह से बहुत खास हैं क्योंकि उनकी ही तरह उन्हें भी काशी की सेवा का मौका मिला। उन्होंने कहा- "मेरा ये भी सौभाग्य है कि 2014 में चुनाव लड़ने के लिए जब मैंने नामांकन भरा, तो प्रस्तावकों में मालवीय जी के परिवार के सदस्य भी थे।"
