India Pakistan Border: जम्मू-कश्मीर के कुपवाड़ा जिले के केरन सेक्टर में एलओसी पर पाकिस्तान ने फिर से सीजफायर का उल्लंघन किया। घटना मंगलवार की रात हुई, जब भारतीय सेना के राष्ट्रीय राइफल्स के जवान सीमा पर हाई-टेक कैमरे लगा रहे थे। इन कैमरों का मकसद था कि एलओसी के ब्लाइंड स्पॉट्स को कवर किया जाए और सीमा सुरक्षा मजबूत हो।
भारत पाकिस्तान बॉर्डर (फाइल फोटो साभार: AP)
क्या है पूरा मामला?
आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक, मंगलवार की रात जब भारतीय सेना के जवान सीमा पर हाई-टेक कैमरे लगा रहे थे, तब पाकिस्तानी सैनिकों ने कैमरे लगाने की प्रक्रिया में खलल डालने के लिए दो राउंड छोटे हथियारों से फायरिंग की। भारतीय सेना ने जवाब में एक ही नियंत्रित गोली चलाई। हालांकि किसी भी तरफ से कोई हताहत नहीं हुआ।
सेना ने तलाशी अभियान किया शुरू
इसके बाद भारतीय सेना ने घने जंगल क्षेत्र में घेराबंदी कर कड़ाई से तलाशी अभियान शुरू किया, क्योंकि उन्हें शक था कि फायरिंग का असली मकसद सीमा पार आतंकियों की घुसपैठ को आसान बनाना हो सकता है। ये कोई नई बात नहीं है। पाकिस्तान की सेना और रेंजर्स अक्सर एलओसी और इंटरनेशनल बॉर्डर पर सीजफायर का उल्लंघन करते हैं। उनका मकसद आमतौर पर आतंकियों की घुसपैठ कराना या सीमा पर लगे निगरानी उपकरणों को बाधित करना होता है।
J&K में LoC की कितनी है लंबाई?
जम्मू-कश्मीर में एलओसी की लंबाई लगभग 740 किलोमीटर है। ये लाइन बरामुल्ला, कुपवाड़ा और बांदीपोरा जिलों से होकर गुजरती है, साथ ही जम्मू डिविजन के पुंछ, राजौरी और कुछ हिस्सों में भी एलओसी है। वहीं, इंटरनेशनल बॉर्डर लगभग 240 किलोमीटर लंबा है और ये जम्मू, सांबा और कठुआ जिलों में है।
एलओसी की सुरक्षा भारतीय सेना करती है, जबकि इंटरनेशनल बॉर्डर की जिम्मेदारी बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स (BSF) की होती है। दोनों ही जगह सेना और बीएसएफ का काम घुसपैठ, तस्करी और पाक की तरफ से ड्रोन गतिविधियों को रोकना है। जम्मू-कश्मीर पुलिस और अन्य सुरक्षा बल पीछे के इलाकों में आतंकवाद के खिलाफ ऑपरेशन चलाते हैं। इन ऑपरेशनों का लक्ष्य आतंकवादी, उनके ओवरग्राउंड वर्कर्स (OGW) और उनके समर्थक होते हैं।
