लोकसभा ने स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ विपक्ष के अविश्वास प्रस्ताव को नारेबाजी के बीच ध्वनि मत से खारिज कर दिया। कार्यवाही के दौरान सदन की अध्यक्षता कर रहे बीजेपी सांसद जगदंबिका पाल ने घोषणा की कि स्पीकर के खिलाफ लाया गया अविश्वास प्रस्ताव बहुमत के अभाव में गिर गया है। उन्होंने विपक्षी सांसदों से बार-बार अपनी सीटों पर लौटने और मतदान प्रक्रिया में शामिल होने की अपील की, लेकिन हंगामा जारी रहने पर उन्होंने सदन की राय ली और प्रस्ताव को वॉइस वोट से खारिज घोषित कर दिया। इसके बाद लोकसभा की कार्यवाही दिनभर के लिए स्थगित कर दी गई।
ओम बिरला
अमित शाह का विपक्ष पर तीखा हमला
इससे पहले केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने लोकसभा में विपक्ष पर कड़ा हमला बोलते हुए कहा कि स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाकर विपक्ष ने भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था की नींव पर सवाल उठाया है। उन्होंने कहा कि संविधान ने स्पीकर को सदन में मध्यस्थ (मीडिएटर) की भूमिका दी है और उस पर संदेह करना लोकतांत्रिक परंपराओं के खिलाफ है।
अमित शाह ने कहा कि संविधान ने स्पीकर को मध्यस्थ की भूमिका दी है और आपने उसी मध्यस्थ पर संदेह जताया है। 75 वर्षों में संसद के दोनों सदनों ने हमारी लोकतांत्रिक व्यवस्था की नींव को ‘पाताल’ से भी गहरा किया है, लेकिन विपक्ष ने उसी नींव की प्रतिष्ठा पर सवाल उठाया है।
स्पीकर की भूमिका का किया बचाव
गृह मंत्री ने कहा कि सदन की कार्यवाही आपसी विश्वास और नियमों के आधार पर चलती है। उन्होंने कहा कि स्पीकर सदन के निष्पक्ष संरक्षक होते हैं और वे सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों का प्रतिनिधित्व करते हैं। उन्होंने कहा कि लोकसभा ने स्वयं नियम बनाए हैं जिनके तहत स्पीकर सदन की कार्यवाही संचालित करते हैं। अमित शाह ने यह भी कहा कि संसद कोई बाजार नहीं है और सांसदों को नियमों और प्रक्रियाओं के अनुसार ही अपनी बात रखनी चाहिए।
गौरतलब है कि बीती दो फरवरी को,बजट सत्र के दौरान राहुल गांधी द्वारा राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान पूर्व सेना प्रमुख एम एम नरवणे के अप्रकाशित संस्मरण से जुड़ा विषय उठाने पर सत्ता पक्ष ने इसका विरोध किया था। जिसके बाद ओम बिरला ने राहुल गांधी को इस विषय पर बोलने की अनुमति नहीं दी थी। वहीं, बाद में सदन की अवमानना के मामले में आठ विपक्षी सांसदों को भी निलंबित किया गया था। इन सब मुद्दों को लेकर सदन में लगातार गतिरोध बना हुआ है। इन्हीं सब बातों को लेकर विपक्ष ने आरोप लगाए थे कि लोकसभा में विपक्षी नेताओं को बोलने नहीं दिया जा रहा है, जबकि सत्तापक्ष के लोगों को कुछ भी बोलने की छूट दी गई है। इसी मुद्दों पर विपक्ष ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश किया था।
जिसके बाद ओम बिरला ने नोटिस दिए जाने के बाद से ही सदन की कार्यवाही से खुद को अलग कर लिया था। लोकसभा सचिवालय ने उस समय कहा था कि इस प्रस्ताव के निपटारे के बाद ही वे सदन की कार्यवाही में वापस लौटेंगे। वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी बिरला का समर्थन करते हुए कहा था कि उन्होंने हमेशा सभी सांसदों को साथ लेकर काम किया है और संविधान तथा संसदीय लोकतंत्र के सिद्धांतों के प्रति प्रतिबद्ध हैं।
