पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत की तरफ़ से जवाबी करवाई में ऑपरेशन सिंदूर किया गया, भारत-पाक के बीच बढ़ता तनाव युद्ध की तस्वीर लेता जा रहा था उसी बीच अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप की ओर से सोशल मीडिया पर पोस्ट करके सीजफायर का ऐलान किया गया, जिसके कुछ समय बाद भारत-पाक ने भी युद्ध विराम को स्वीकारा।
पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत की तरफ़ से जवाबी करवाई में ऑपरेशन सिंदूर किया गया
हालांकि कई पार्टियो ने विशेष सत्र को लेकर अभी भी अपना स्टैंड साफ़ नही किया है, इस रिपोर्ट में हम आपको बतायेंगे देश की मुख्य विपक्षी पार्टी विशेष सत्र को लेकर क्या सोचती है।
मनोज झा:
हमारे सामने 1962 का सबसे बड़ा उदाहरण है जब भारत-चीन के बीच मध्य युद्ध में संसद बैठी थी,संसद का सत्र एक संदेश विश्व को भी देगा और एक संदेश स्वघोषित सरपंच को भी जाएगा जो भारत की आत्मीयता को चुनौती दे रहे है. हम पहलगाम की पीड़ा को
पवार : 'मैं संसद का विशेष सत्र बुलाने के खिलाफ नहीं हूं, लेकिन यह एक संवेदनशील और गंभीर मुद्दा है और संसद में ऐसे गंभीर मुद्दों पर चर्चा करना मुश्किल होता है… राष्ट्रीय हित में जानकारी को गोपनीय रखना आवश्यक है… विशेष सत्र बुलाने के बजाय, अगर हम सभी एक साथ बैठें (सर्वदलीय बैठक के लिए), तो यह अधिक उचित होगा।'
सपा की चुप्पी
लखनऊ में सपा के एक नेता ने कहा कि कांग्रेस ने विशेष सत्र की मांग उठाने से पहले उनसे संपर्क नहीं किया था। 'हमने पिछली बार जब यह मांग उठी थी, तब उसका समर्थन किया था। लेकिन इस बार कांग्रेस ने हमसे कोई बात नहीं की, और हमने भी कुछ नहीं कहा क्योंकि ऐसा करना ही ठीक है। हमें पता है कि राष्ट्रीय सुरक्षा एक संवेदनशील विषय है… और हमारे जैसे राज्य में इसका ज़्यादा असर भी नहीं है।'
टीएमसी अपनी रफ्तार में
जहां तक टीएमसी का सवाल है, वह अक्सर कांग्रेस पार्टी से अलग राह अपनाती रही है… युद्धविराम की घोषणा को लेकर टीएमसी प्रमुख पहले ही पार्टी की रणनीति स्पष्ट कर चुकी हैं।
तृणमूल कांग्रेस के सांसद सौगत रॉय का मानना है कि विशेष सत्र बुलाना इस समय की ज़रूरत है ताकि अमेरिकी राष्ट्रपति की हालिया टिप्पणी को समझाया जा सके और यह बताया जा सके कि वह ऐसा क्यों कह रहे हैं। हालांकि उन्होंने कहा कि यह उनकी व्यक्तिगत राय है।
हालांकि, अन्य सांसद इस मुद्दे पर चुप्पी साधे हुए हैं और ऐसा प्रतीत होता है कि नेतृत्व ने उन्हें मौजूदा हालात पर बोलने से मना किया है।
