Siachen: दुनिया के सबसे लंबे 'ऑपरेशन मेघदूत' के 39 साल पूरे, सियाचिन डे पर देश कर रहा वीर सपूतों को नमन

  • Authored by: शिवानी शर्माEdited by: रामानुज सिंह
  • Updated Apr 13, 2023, 03:42 PM IST

सियाचिन में दिन का अधिकतम तापमान -40 डिग्री तक रहता है। इस विषम क्षेत्र में खून जमा देने वाली ठंड में भी भारतीय सेना के सैनिक लगातार यहां तैनात रहते हैं। इस इलाके में भारतीय सेना के ऑपरेशन मेघदूत ने 39 साल पूरे कर लिए हैं। देश सियाचिन दिवस पर भारत के वीर सपूतों नमन कर रहा है।

दुनिया के सबसे दुर्गम और चुनौतियों भरे युद्ध क्षेत्र सियाचिन में भारतीय सेना के ऑपरेशन मेघदूत ने 39 साल पूरे कर लिए हैं। ऑपरेशन मेघदूत दुनिया का अब तक का सबसे लंबा सैन्य ऑपरेशन है। 13 अप्रैल 1984 को पाकिस्तान के नापाक मंसूबों को मिट्टी में मिलाने के लिए भारतीय सेना को सियाचिन की पहाड़ियों पर तैनात किया गया था। यह वह जगह है जहां न सिर्फ पहुंचना असंभव है बल्कि यहां की विषम परिस्थितियों में जीवित रहना भी किसी आम आदमी के लिए नामुमकिन है।

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भारत का सबसे विषम युद्ध क्षेत्र सियाचिन (तस्वीर सौजन्य-Indian Army)

सियाचिन एक विषम युद्ध क्षेत्र है

सियाचिन की बात की जाए तो यह पहाड़ 14000 से लेकर 20000 फुट तक की ऊंचाई पर पूरी तरह से बर्फ से ढके हुए हैं। सियाचिन एक ग्लेशियर है यानि बर्फ की एक ऐसी मोटी चादर जो लगातार खिसकती रहती है। यहां एक जगह से दूसरी जगह तक जाना बेहद खतरनाक होता है। ग्लेशियर के बीच में क्रेवास यानि खाई दिखाई नहीं देती, जिसके चलते कई बार दुर्घटनाएं हो जाती हैं। पिछले 39 सालों में इस विषम युद्ध क्षेत्र में भारतीय सेना ने अपने 846 से ज्यादा जवानों को खोया है।

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