Northeast Rainfall: मानसून के आने से पहले ही बादलों ने रुख बदल लिया है। खासकर, पूर्वोत्तर के राज्यों में बादलों से तबाही बरस रही है। ज्यादातर राज्यों में भीषण बारिश से आम जनजीवन पूरी तरह प्रभावित है। मणिपुर, त्रिपुरा, सिक्किम और असम में रात दिन भारी से अति भारी बारिश से करीब 10 नदियां उफान पर हैं, अधिकतर क्षेत्रों में बाढ़ जैसे हालात बन चुके हैं। अधिक वर्षा के कारण लोगों के घर क्षतिग्रस्त हो गए हैं। हजारों की संख्या में लोग बुरी तरह प्रभावित हैं। हालांकि, एनडीआरएफ समेत अन्य बचाव दल राहत बचाव कार्य कर रहे रहे। केवल मणिपुर में पिछले 48 घंटों में बाढ़ और भूस्खलन की वजह से 3,802 लोग प्रभावित हुए हैं और 883 घर क्षतिग्रस्त हो गए हैं। कमोबेश यही हालात असम, त्रिपुरा समेत अन्य सीमावर्ती राज्यों में है। आईएमडी ने अभी इसी तरह के मौसम के संकेत दिए हैं। अगर, यही हालात रहे तो स्थिति और भयावह हो सकती है। आईएमडी ने रेड अलर्ट जारी किया है।
पूर्वोत्तर में बारिश की रेड अलर्ट
मणिपुर में तटबंध टूटे
मणिपुर में धिकारियों ने बताया कि नदियों के उफान पर आने और तटबंध टूटने के कारण राज्य की राजधानी इंफाल और इंफाल पूर्व जिले के कई इलाकों में जलभराव हो गया। मणिपुर के राज्यपाल अजय कुमार भल्ला ने इंफाल शहर के कई जलमग्न इलाकों का दौरा किया, जबकि सेना और असम राइफल्स के जवानों ने सबसे अधिक प्रभावित जिले इंफाल पूर्व में जलमग्न इलाकों से लगभग 800 लोगों को बचाया। राज्य में बाढ़ और भूस्खलन के परिणामस्वरूप पिछले 48 घंटों में कम से कम 3,802 लोग प्रभावित हुए हैं और 883 घर क्षतिग्रस्त हुए हैं। शनिवार शाम तक कुल 3,275 इलाके या गांव भारी बारिश की चपेट में आ चुके हैं, जिसमें दो लोग घायल भी हुए हैं तथा 64 जानवरों की मौत की खबर है। अब तक राज्य भर में कुल मिलाकर भूस्खलन की 12 घटनाएं हुई हैं।
एक अन्य अधिकारी ने बताया कि चेकॉन क्षेत्र में इंफाल नदी के उफान पर आने के बाद ऑल इंडिया रेडियो के इंफाल परिसर और जवाहरलाल नेहरू आयुर्विज्ञान संस्थान सहित कई कार्यालयों और प्रतिष्ठानों के परिसर में जलभराव हो गया। रविवार को इंफाल पूर्व जिले में इरिल नदी का जलस्तर खतरे के निशान को पार कर गया, हालांकि अभी तक तटबंध नहीं टूटा है। स्थानीय लोग और अधिकारी तटबंधों को मजबूत करने का प्रयास कर रहे हैं।
एक अन्य अधिकारी ने बताया कि चेकॉन और वांगखेई में जलस्तर रविवार सुबह कम हो गया, लेकिन खुरई और हिंगांग निर्वाचन क्षेत्रों में स्थिति अभी भी जस की तस बनी हुई है। राजभवन की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि अपने दौरे के दौरान राज्यपाल ने अधिकारियों को नदी की स्थिति पर बारीकी से नजर रखने और एहतियाती उपाय लागू करने के निर्देश दिए। बयान के अनुसार राज्यपाल ने प्रभावित लोगों के लिए निकासी और अस्थायी राहत उपायों की व्यवस्था करने के लिए उपायुक्तों को निर्देश दिए हैं और राज्य आपदा मोचन बल (एसडीआरएफ) और राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) की इकाइयों को भी सतर्क कर दिया गया है।
त्रिपुरा में मौसम खराब
त्रिपुरा में लगातार हो रही बारिश के कारण बड़े पैमाने पर जलभराव होने से एक व्यक्ति की सीवर में गिरने से मौत हो गई। अधिकारियों ने बताया कि राज्य की राजधानी अगरतला में महज तीन घंटे में करीब 200 मिमी बारिश हुई, जो रिकॉर्ड है। रातभर हुई बारिश के कारण सामान्य जनजीवन प्रभावित हुआ और लोगों को मुख्यमंत्री माणिक साहा के आवास के सामने घुटनों तक भरे पानी में चलकर जाना पड़ा। साहा ने रविवार को कहा कि पिछले 48 घंटों से लगातार हो रही बारिश के कारण लगभग 1,300 परिवारों ने पश्चिम त्रिपुरा जिले के शिविरों में शरण ली है। पश्चिम त्रिपुरा को छोड़कर बाकी सात जिलों में स्थिति लगभग सामान्य है, हालांकि लगातार बारिश के कारण कई निचले इलाकों में जलभराव हो गया है। पश्चिम त्रिपुरा के जिलाधिकारी विशाल कुमार ने बताया कि कई निचले इलाकों में बाढ़ का पानी भर जाने के बाद 5,000 से अधिक शहरवासियों ने अगरतला नगर निगम के 27 राहत शिविरों में शरण ली है।
मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया मंच 'फेसबुक' पर लिखा, "पिछले दो दिनों से लगातार हो रही बारिश के कारण लगभग 1,300 परिवारों ने पश्चिम त्रिपुरा जिले में राहत शिविरों में शरण ली है। सरकार स्थिति पर कड़ी नजर रख रही है। जिला प्रशासन, राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ), राज्य आपदा मोचन बल (एसडीआरएफ), नागरिक स्वयंसेवक और विभिन्न एजेंसियों को फंसे हुए लोगों की मदद के लिए तैनात किया गया है।"
सिक्किम में भारी बारिश से तबाही
सिक्किम में रविवार को लगातार बारिश होने से तीस्ता नदी का जलस्तर बढ़ गया, जबकि इस सप्ताह की शुरुआत में हुई एक दुखद दुर्घटना के बाद नौ लापता लोगों की तलाश अभी भी स्थगित है। चुबोम्बु के पास 11 लोगों को ले जा रहा एक पर्यटक वाहन सड़क से उतरकर करीब 1,000 फीट नीचे तीस्ता नदी में जा गिरा। उस रात दो यात्रियों को बचा लिया गया, जबकि चालक सहित शेष नौ लोगों का अभी भी पता नहीं चल पाया है। खराब मौसम के कारण अभियान में बाधा आ रही है। रात भर हुई भारी बारिश और ऊपरी क्षेत्रों में बादल फटने से हालात और खराब हो गए हैं। आईएमडी ने मंगन जिले के लिए रेड अलर्ट जारी किया है, जिसमें भारी से बहुत भारी बारिश का अनुमान है। अगले 24 घंटों के लिए ग्यालशिंग, नामची, सोरेंग, गंगटोक और पाकयोंग के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है।
जिला अधिकारियों ने पुष्टि की है कि लगातार बारिश के कारण हुए भूस्खलन से उत्तरी सिक्किम के थींग और चुंगथांग क्षेत्रों में कई संपत्तियों को नुकसान पहुंचा है। मंगन के पुलिस अधीक्षक सोनम देचू भूटिया के अनुसार, 115 पर्यटक वर्तमान में लाचेन में और लगभग 1,350 लाचुंग में फंसे हुए हैं। भूटिया ने कहा, "कई भूस्खलनों के कारण दोनों दिशाओं से पहुंच अवरुद्ध होने के कारण, पर्यटकों को अपने होटलों में रहने की सलाह दी गई है। एक बार सड़कें पूरी तरह से साफ हो जाने के बाद निकासी शुरू हो जाएगी। पूरे दिन क्षेत्र में भारी बारिश जारी रही, जिसका खास तौर पर चुंगथांग उप-विभाग पर असर पड़ा। शुक्रवार दोपहर को बाधित हुई बिजली आपूर्ति शनिवार शाम तक बहाल हो गई। करीब 24 घंटे से बंद मोबाइल कनेक्टिविटी शनिवार दोपहर करीब 3 बजे बहाल हुई। अधिकारी रविवार तक पेयजल आपूर्ति बहाल करने के लिए भी काम कर रहे हैं। अधिकारियों ने बताया कि क्षेत्र में बादल फटने से तीस्ता नदी में उफान आया है, जिससे बचाव और राहत कार्यों में चुनौतियां बढ़ गई हैं।
असम में उफान पर नदियां
असम में भारी बारिश जारी है, जिससे रेल और सड़क सेवाएं बाधित हैं। राज्य के 15 से अधिक जिलों में 78,000 से ज्यादा लोग प्रभावित हुए हैं। सीडब्ल्यूसी ने राज्य में ‘गंभीर बाढ़ की स्थिति’ को देखते हुए ‘ऑरेंज बुलेटिन’ जारी किया है। ब्रह्मपुत्र और बराक सहित 10 प्रमुख नदियां खतरे के निशान से ऊपर प्रवाहित हो रही हैं। शनिवार शाम तक भूस्खलन से पांच और बाढ़ से तीन लोगों की जान जा चुकी थी। राज्य के पश्चिमी हिस्से के तीन जिलों में ‘रेड अलर्ट’ और आठ जिलों में ‘ऑरेंज अलर्ट’ जारी किया गया था। सीडब्ल्यूसी के बुलेटिन में कहा गया है कि डिब्रूगढ़ और निमती घाट (जोरहाट) में ब्रह्मपुत्र नदी खतरे के निशान से ऊपर प्रवाहित हो रही है। अन्य नदियां जो खतरे के निशान को पार कर गई हैं उनमें घारमुरा (हैलाकांडी) में धलेश्वरी नदी, ढोलाई (कछार) में रुकनी, मटिजुरी (हैलाकांडी) में कटखल, बदरपुर घाट (श्रीभूमि) में बराक, नुमालीगढ़ (गोलाघाट) में धनसिरी और कांपुर (नगांव) में कोपिली शामिल हैं।
