ग्रेटर नोएडा में प्रस्तावित ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) प्रदर्शन के मामले में गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय के छात्र अक्षत त्रिपाठी को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। सुप्रीम कोर्ट को सोमवार को बताया गया कि छात्र के खिलाफ BNSS की धारा 126/130 के तहत जारी नोटिस वापस ले लिया गया है।यह मामला CJI सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ के सामने आया। अक्षत त्रिपाठी ने ग्रेटर नोएडा के कार्यकारी मजिस्ट्रेट की ओर से जारी नोटिस को चुनौती दी थी। नोटिस में उनसे कथित तौर पर छात्रों को CJP धरने में शामिल होने के लिए प्रोत्साहित करने के आरोप में 5 लाख रुपये का निजी मुचलका और इतनी ही राशि के दो जमानती पेश करने को कहा गया था।
सुप्रीम कोर्ट (फाइल फोटो-PTI)
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छात्र को नोटिस वापस लेने की सूचना नहीं- वकील
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील ने शुरुआत में मामले को कुछ देर बाद सुनने यानी पासओवर की मांग की। इस पर CJI सूर्यकांत ने कहा कि पासओवर की जरूरत नहीं है और कोर्ट खुद नोटिस को रद्द कर सकता है। इसके बाद अधिकारियों की ओर से पेश ASG ऐश्वर्या भाटी ने कोर्ट को बताया कि संबंधित नोटिस पहले ही वापस लिया जा चुका है। याचिकाकर्ता के वकील ने हालांकि कहा कि छात्र को नोटिस वापस लिए जाने की कोई सूचना नहीं मिली है।
सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में ASG के इस बयान को रिकॉर्ड किया कि नोटिस वापस ले लिया गया है। कोर्ट ने साथ ही स्पष्ट किया कि नोटिस के आधार पर अतीत में यदि कोई कार्रवाई की गई है, तो वह भी निरस्त मानी जाएगी और छात्र के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी।
पिछली सुनवाई में CJI ने उठाया था सवाल
इससे पहले की सुनवाई में CJI सूर्यकांत ने सवाल उठाया था कि जब सुप्रीम कोर्ट ने छात्रों के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं करने का स्पष्ट निर्देश दिया था, तो कार्यकारी मजिस्ट्रेट ने ऐसा नोटिस कैसे जारी कर दिया।
CJI ने संबंधित अधिकारी से इस मामले में स्पष्टीकरण लिए जाने की बात भी कही थी। इसी के बाद अक्षत त्रिपाठी ने BNSS के तहत शुरू की गई निवारक कार्रवाई को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था।
