नोएडा इंजीनियर मौत मामला: ग्रेटर नोएडा के सेक्टर 150 में, एक तेज 90-डिग्री का मोड़ पानी से भरे एक प्लॉट के किनारे से गुजरता है। प्लॉट की बाउंड्री के साथ-साथ 2 फुट ऊंची दीवार है, जो सिर्फ एक हल्की प्रोटेक्शन का काम करती है। बैकग्राउंड में, ऊंची-ऊंची इमारतें हैं जिनके गेट इतने ऊंचे हैं कि उन पर चढ़ा नहीं जा सकता, और वे उस पूरे इलाके पर हावी दिखती हैं। नेशनल कैपिटल रीजन के जनवरी के मौसम में, धुंध की वजह से सब कुछ ग्रे दिखता है।
नोएडा इंजीनियर मौत मामला: बिल्डर अभय कुमार आए जेल से बाहर
16 जनवरी को, युवराज मेहता के लिए घर लौटने का एक रूटीन सफर जानलेवा साबित हुआ। गुरुग्राम में अपने वर्कप्लेस से, लगभग 60 किलोमीटर दूर से लौटते समय, यूरेका पार्क में अपने अपार्टमेंट से कुछ ही मीटर पहले, युवराज की कार इस तेज मोड़ पर सड़क से उतर गई और पानी से भरे गड्ढे में जा गिरी। इसमें उनकी मौत हो गई। और नोएडा अथॉरिटी से लेकर बिल्डर सबपर बड़े सवाल खड़े हो गए। इस मामले में एमजेड विजटाउन प्लानर्स प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक व बिल्डर अभय कुमार को गिरफ्तार किया गया था।
अभय कुमार को रिहा करो
जहां, इलाहाबाद हाई कोर्ट के जस्टिस सिद्धार्थ और जस्टिस जय कृष्ण उपाध्याय की डिविजीन बेंच ने बिल्डर अभय कुमार को तुरंत जमानत देने का आदेश दिया। बता दें कि इंजीनियर युवराज की मौत के मामले में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने बड़ा फैसला देते हुए हैबियस कॉर्पस की याचिका मंजूर कर ली। अदालत ने बिल्डर अभय कुमार को तुरंत रिहा करने का आदेश जारी किया, जहां देर रात बिल्डर अभय कुमार को जेल से रिहा कर दिया गया।
क्यों मिली रिहाई?
इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश के अनुसार नोएडा पुलिस ने गिरफ्तारी के समय अरेस्ट मेमो की क्लॉज 13 का पालन नहीं किया गया, जिस कारण गिरफ्तारी को अवैध माना गया।
क्लॉज 13 के तहत जरूरी दिशानिर्देश क्या हैं?
1. गिरफ्तारी के कारण स्पष्ट रूप से बताना
2.अरेस्ट मेमो की प्रति आरोपी को देना
3.आरोपी के किसी रिश्तेदार/दोस्त को गिरफ्तारी की सूचना देना और उसका उल्लेख मेमो में करना
कोर्ट ने कहा कि इन अनिवार्य प्रक्रियाओं का पालन किए बिना की गई गिरफ्तारी कानूनन वैध नहीं है, इसलिए आरोपी को तत्काल रिहा करने का निर्देश दिया गया।
अब यूपी सरकार क्या करेगी?
अब उत्तर प्रदेश सरकार के पास अगला मुख्य विकल्प सुप्रीम कोर्ट में SLP (Special Leave Petition) दाखिल करना है। जिसमें हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती दी जा सकती है। इसके साथ ही में गिरफ्तारी पर रोक की मांग भी की जा सकती है। कुमार को 20 जनवरी को लापरवाही के कारण गैर इरादतन हत्या और BNS की अन्य धाराओं के तहत गिरफ्तार किया गया था।
