प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ऑपरेशन सिंदूर पर चर्चा के दौरान विपक्ष के आरोपों पर जवाब देते हु एकहा कि भारत ने ऑपरेशन सिंदूर किसी भी देश के कहने पर नहीं रोका। पीएम मोदी ने कहा कि यहां पर विदेश नीति को लेकर भी काफी बातें कही गईं। दुनिया के समर्थन को लेकर भी काफी बातें कही गईं। दुनिया में किसी भी देश ने भारत को अपनी सुरक्षा में कार्रवाई करने से रोका नहीं है। 193 देशों में से सिर्फ 3 देश ने पाकिस्तान के समर्थन में बयान दिया था। QUAD हो या BRICS हो... दुनियाभर से भारत को समर्थन मिला। कुछ लोग भारतीय सेना के बयान पर विश्वास नहीं करके पाकिस्तान के झूठ एवं प्रचार को आगे बढ़ा रहे हैं।
लोकसभा में ऑपरेशन सिंदूर पर बोलते हुए पीएम मोदी (फोटो- संसद टीवी)
जब अमेरिका से आया फोन
पीएम मोदी ने ऑपरेशन सिंदुर के दौरान अमेरिकी सरकार से बातचीत को लेकर कहा- "9 मई की रात को अमेरिका के उपराष्ट्रपति ने मुझसे बात करने की कोशिश की। उन्होंने एक घंटे तक कोशिश की, लेकिन मैं अपनी सेना के साथ मीटिंग में था, इसलिए मैं उनका फोन नहीं उठा सका। बाद में मैंने उन्हें वापस कॉल किया। अमेरिका के उपराष्ट्रपति ने मुझे फोन पर बताया कि पाकिस्तान बड़ा हमला करने वाला है। मेरा जवाब था कि अगर पाकिस्तान की यही मंशा है तो उसे बहुत नुकसान होगा। अगर पाकिस्तान हमला करता है तो हम बड़ा हमला करके जवाब देंगे। ये मेरा जवाब था..."
ऑपरेशन सिंदूर और संघर्ष विराम
मोदी ने कहा कि 6-7 मई की रात को ऑपरेशन सिंदूर के तहत सैन्य कार्रवाई को अंजाम देने के बाद सात मई की सुबह ही सेना ने संवाददाता सम्मेलन में साफ कर दिया था कि हमारा लक्ष्य आतंकवादियों, उनके आकाओं और उनके अड्डों को ध्वस्त करना था और हमने अपना काम पूरा कर लिया। मोदी ने कहा, ‘‘मैं डंके की चोट पर दोहराता हूं कि भारतीय सेना ने पाकिस्तान की सेना को कार्रवाई के चंद मिनटों में बता दिया कि हमारा यह लक्ष्य था, हमने इसे पूरा कर दिया है।’’ उन्होंने कहा कि पाकिस्तान में समझदारी होती तो आतंकियों के साथ खुलेआम खड़े रहने की गलती नहीं करता, लेकिन उन्होंने निर्लज्ज होकर आतंकवादियों के साथ खड़े रहने का फैसला किया। मोदी ने कहा कि जब पाकिस्तान ने आतंकियो की मदद में आने का फैसला किया तो भारत की सेना ने ऐसा करारा जवाब दिया जो उन्हें सालों तक याद रहेगा। प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘नौ मई की मध्य रात्रि और 10 मई की सुबह हमारी मिसाइलों ने पाकिस्तान के हर कोने में ऐसा प्रचंड प्रहार किया, जिसकी उसने कभी कल्पना नहीं की होगी।’’ उन्होंने कहा कि इतना कड़ा प्रहार हुआ, तब जाकर पाकिस्तान ने फोन करके डीजीएमओ के सामने हमले रोकने की गुहार लगाई।
