PM Modi in Parliament: संसद के शीतकालीन सत्र से पहले पीएम मोदी संसद भवन पहुंचे। संसद सत्र से पहले पीएम मोदी ने कहा कि भारत ने लोकतंत्र को जिया है। ये सत्र देश के विकास में ऊर्जा भरेगा। देश को तेज गति से आगे ले जाने की कोशिश है। विपक्षी अहम मुद्दे उठाएं, पराजय की निराशा से बाहर निकलकर आएं। मेरा सभी दलों से आग्रह है कि शीतकालीन सत्र में पराजय की बौखलाहट को मैदान नहीं बनना चाहिए। ये सत्र विजय के अहंकार में भी नहीं बदलना चाहिए। बहुत संतुलित तरीके से, जिम्मेदारी के साथ, जनप्रतिनिधित्व का दायित्व दिया है, उसे संभालते हुए आगे बढ़ें।
संसद सत्र से पहले पीएम मोदी का बयान (ANI)
विपक्ष को दी नसीहत
पीएम मोदी ने कहा, मैं इस शीतकालीन सत्र में सभी दलों से आग्रह करता हूं कि हार की घबराहट को बहस का विषय न बनने दें। जनप्रतिनिधि होने के नाते हमें देश की जनता की जिम्मेदारियों और अपेक्षाओं को अत्यंत संतुलन और जिम्मेदारी के साथ, भविष्य के बारे में सोचते हुए, निभाना चाहिए।
ड्रामा नहीं, डिलीवरी चाहिए
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, संसद ड्रामा करने की जगह नहीं, बल्कि डिलीवर करने की जगह है। नाटक करने की कई जगहें हैं; विपक्ष ने जहां हार का सामना किया है, वहां नाटक किया है और जहां हार का सामना होगा, वहां फिर से करेगा। पिछले कुछ समय से संसद का इस्तेमाल या तो चुनावों की तैयारी के लिए या हार के बाद अपनी हताशा निकालने के लिए किया जा रहा है।
उन्होंने कहा, यह सत्र इस बात पर केंद्रित होना चाहिए कि यह संसद देश के बारे में क्या सोचती है, देश के लिए क्या करना चाहती है। इन मुद्दों पर ध्यान केंद्रित होना चाहिए। विपक्ष को भी अपनी जिम्मेदारी निभानी चाहिए। उन्हें ऐसे मुद्दे उठाने चाहिए, मजबूत मुद्दे। उन्हें हार की निराशा से उबरना चाहिए। कोई ड्रामा नहीं, सिर्फ डिलीवरी होनी चाहिए। दुर्भाग्य से कुछ दल ऐसे हैं जो हार को पचा नहीं पा रहे हैं। और मैं सोच रहा था कि बिहार के नतीजे आए इतना समय बीत चुका है, तो शायद वे थोड़ा शांत हो गए होंगे। लेकिन कल जो मैंने सुना, उससे लगता है कि हार ने उन्हें परेशान कर दिया है।
राष्ट्र निर्माण पर ध्यान केंद्रित करें
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, राजनीति में नकारात्मकता उपयोगी हो सकती है। लेकिन अंततः राष्ट्र निर्माण के लिए सकारात्मक सोच भी होनी चाहिए। मैं आपसे अपेक्षा करता हूं कि आप नकारात्मकता को सीमित रखें और राष्ट्र निर्माण पर ध्यान केंद्रित करें। यह शीतकालीन सत्र एक और कारण से भी महत्वपूर्ण है। हमारे नए सभापति हमारे उच्च सदन को मार्गदर्शन देंगे। मैं उन्हें शुभकामनाएं देता हूँ। जीएसटी सुधारों ने देशवासियों में श्रद्धा का वातावरण बनाया है। इस सत्र में भी इस दिशा में बहुत काम होगा।
