IT की निरस्त धारा 66A के तहत किसी के खिलाफ नहीं चलाया जा सकता केस, SC का बड़ा फैसला

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  • Updated Oct 12, 2022, 09:16 PM IST

Supreme Court News : सीजेआई ललित की अगुवाई वाली पीठ ने आगे कहा कि जिन मामलों में लोग आईटी अधिनियम की धारा 66-ए के कथित उल्लंघन के मुकदमे का सामना कर रहे हैं, उनमें संदर्भ और प्रावधान निरस्त रहेंगे।

KEY HIGHLIGHTS
  • 2015 में सूचना प्रौद्योगिकी (IT) एक्ट, 2000 की धारा 66ए खत्म हो गई
  • सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि यह धारा संविधान का उल्लंघन करती है
  • किसी के खिलाफ आपत्तिजनक पोस्ट करने पर तीन साल की सजा हो सकती थी

Supreme Court News : सूचना प्रौद्योगिकी (IT) एक्ट 2000, की निरस्त धारा 66A पर सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को बड़ा फैसला सुनाया। शीर्ष अदालत ने अपने आदेश में कहा कि अदालत ने इस एक्ट की धारा 66ए को साल 2015 में खारिज कर दिया, इसलिए अब इसके तहत किसी व्यक्ति पर मुकदमा नहीं चलाया जा सकता। इस धारा के खत्म किए जाने से पहले तक आपत्तिजनक सामग्री पोस्ट करने पर तीन साल तक की सजा एवं उस पर जुर्माना लगाने का प्रावधान था।

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आईटी की निरस्त धारा 66ए पर सुप्रीम कोर्ट की अहम टिप्पणी।

सीजेआई की पीठ ने दिया आदेश

प्रधान न्यायाधीश यूयू ललित, जस्टिस अजय रस्तोगी एवं जस्टिस एस रवींद्र भट्ट की पीठ ने अपने आदेश में कहा कि यह कहने में अब कोई गुरेज नहीं है कि धारा 66ए संविधान का उल्लंघन करती थी। इसलिए आईटी एक्ट की धारा 66ए के तहत कथित अपराध के लिए किसी नागरिक पर मुकदमा नहीं चलाया जा सकता।

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