बिहार की जातिवार गणना के बाद नीतीश का बढ़ा रुतबा, लोकसभा चुनाव से पहले खेला 'ट्रंप कार्ड'

  • Written by: आलोक कुमार राव
  • Updated Oct 3, 2023, 09:06 AM IST

Bihar Caste Census Report: आबादी की यह रिपोर्ट ओबीसी को आरक्षण की तय अधिकतम सीमा 50 फीसदी को बढ़ाए जाने की मांग करेगी। सुप्रीम कोर्ट का फैसला है कि देश में 50 फीसदी से ज्यादा आरक्षण नहीं हो सकता। हो सकता है कि आरक्षण की सीमा बढ़ाए जाने को लेकर राजीतिक पार्टियों में टकराव देखने को मिले लेकिन इसकी संभावना कम ही है कि आरक्षण की तय सीमा बढ़ाए जाने का विरोध कोई भी राजनीतिक दल करेगा।

Bihar Caste Census Report: बिहार में जातिवार गणना की रिपोर्ट सामने आने के बाद राष्ट्रीय राजनीति में हलचल होनी शुरू हो गई है। विपक्ष इसमें अपने लिए एक बड़ा सियासी फायदा देख रहा है। तो भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) संभल कर बयान दे रही है। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने लोकसभा चुनाव 2024 से पहले जातिवार गणना का जो दांव चला है, राजनीति के जानकार उसे 'टंप कार्ड' के रूप में देख रहे हैं। जानकारों का मानना है कि बिहार की जातिवार रिपोर्ट के बाद अन्य राज्यों एवं राष्ट्रीय स्तर पर इसी तरह की जातिगत गणना की मांग जोर पकड़ेगी।

nitish kumar

जातिवार गणना कराने के बाद नीतीश कुमार का राजनीतिक कद बढ़ा।

रिपोर्ट में पिछड़ी जातियां करीब 63 फीसदी

जाहिर तौर पर बिहार जातिवार गणना की रिपोर्ट में पिछड़ी जातियों (करीब 63 फीसदी) और अनुसूचित जाति (करीब 20 प्रतिशत) आबादी सामने आई है, उससे सामाजिक एवं आर्थिक न्याय की मांग नए सिरे से जोर पकड़ेगी। ओबीसी समुदाय अपने लिए ज्यादा आरक्षण की मांग कर सकता है। 2014 के लोकसभा चुनाव में ओबीसी का एक बड़ा तबका भाजपा के साथ चला गया, इसका सियासी नुकसान विपक्ष को हुआ। विपक्ष की कोशिश ओबीसी को अपनी तरफ लाने की है। राहुल गांधी सहित विपक्ष का कहना है कि 'जिसकी जितनी आबादी उसकी उतनी हिस्सेदारी'।

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