केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी के रतलाम दौरे के दौरान दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे पर बड़ा हादसा होते-होते टल गया। बताया जा रहा है कि गडकरी का काफिला करीब 120 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से एक्सप्रेसवे पर गुजर रहा था, तभी अचानक कुछ ग्रामीण बीच सड़क पर दिखाई दे गए। समय रहते वाहन चालकों ने संतुलन बनाए रखा, जिससे न तो ग्रामीण किसी वाहन की चपेट में आए और न ही काफिले की गाड़ियां आपस में टकराईं।
रतलाम में नितिन गडकरी के काफिले के सामने पहुंचे ग्रामीण।
ग्रामीणों की शिकायतें लेकर पहुंचे थे लोग
घटना रतलाम के शिवगढ़ थाना क्षेत्र के आसपास की बताई जा रही है। केंद्रीय मंत्री गडकरी दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे के रतलाम और झाबुआ जिले के हिस्से का निरीक्षण कर रहे थे। इसी दौरान कुछ ग्रामीण एक्सप्रेसवे निर्माण के कारण बंद हुए संपर्क मार्गों, खेतों में जलभराव और आवागमन की समस्याओं को लेकर अपनी शिकायतें मंत्री तक पहुंचाने के लिए सड़क पर आ गए। सुरक्षा व्यवस्था के बावजूद उनका काफिले के सामने पहुंच जाना गंभीर सुरक्षा चूक माना जा रहा है।वीडियो फुटेज के आधार पर जांच शुरू
घटना के बाद पुलिस प्रशासन में हड़कंप मच गया। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक विवेक कुमार लाल ने बताया कि काफिले के आने से पहले स्थानीय लोगों और जनप्रतिनिधियों से मुलाकात कर उनकी मांगें सुनी गई थीं और ज्ञापन भी ले लिया गया था। इसके बावजूद काफिले के सामने अचानक कौन लोग पहुंचे और वे एक्सप्रेसवे तक कैसे पहुंचे, इसकी जांच की जा रही है। पुलिस अब वीडियो फुटेज के आधार पर पूरे घटनाक्रम की पड़ताल कर रही है।नितिन गडकरी बुधवार रात मंदसौर जिले के गरोठ में रात्रि विश्राम के बाद गुरुवार सुबह करीब 8:15 बजे अपने अगले दौरे के लिए रवाना हुए। सुबह लगभग 10:25 बजे उनका काफिला रतलाम जिले की असावती सीमा पर पहुंचा, जहां कलेक्टर मिशा सिंह और पुलिस अधीक्षक अमित कुमार ने उनका स्वागत किया। असावती में करीब पांच मिनट रुककर गडकरी ने दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे के निर्माण कार्यों और उसकी प्रगति की समीक्षा की। इसके बाद वह 19 वाहनों के सुरक्षा काफिले के साथ झाबुआ के लिए रवाना हो गए।
रेस्ट एंड सर्विस एरिया में पेट्रोल पंप का उद्घाटन
अपने दौरे के दौरान गडकरी जावरा और थांदला के बीच स्थित रेस्ट एंड सर्विस एरिया भी पहुंचे, जहां उन्होंने एक नए पेट्रोल पंप का उद्घाटन किया। हालांकि, व्यस्त कार्यक्रम के कारण उन्होंने मीडिया से बातचीत नहीं की। साथ ही, अपनी विभिन्न समस्याओं को लेकर रास्ते में उनका इंतजार कर रहे स्थानीय ग्रामीणों से भी मुलाकात नहीं हो सकी।
