NHRC Notice Meta Instagram CSAM: इंस्टाग्राम पर बच्चों से जुड़ी यौन शोषण वाली सामग्री (CSAM/CSEAM) के कथित विज्ञापनों को लेकर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने गंभीर रुख अपनाया है। BBC World Service की रिपोर्ट के आधार पर आयोग ने मामले का संज्ञान लेते हुए Meta, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY), सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय और दिल्ली पुलिस से कार्रवाई की रिपोर्ट मांगी है।
इंस्टाग्राम पर बच्चों से जुड़ी अश्लील सामग्री के विज्ञापनों का गंभीर मामला, NHRC ने Meta, MeitY, I&B मंत्रालय और दिल्ली पुलिस को भेजा कड़ा नोटिस
आयोग के मुताबिक, BBC की रिपोर्ट में आरोप लगाया गया था कि इंस्टाग्राम पर पेड विज्ञापनों के जरिए 'रेप वीडियो' और 'चाइल्ड वीडियो' जैसे शब्दों का इस्तेमाल कर लोगों को टेलीग्राम के चैनलों तक पहुंचाया जा रहा था, जहां कथित तौर पर बच्चों से जुड़ी यौन शोषण सामग्री बेचने की पेशकश की जा रही थी। रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया कि ये विज्ञापन Meta की समीक्षा व्यवस्था से गुजरने के बावजूद प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध रहे।
POCSO के तहत रिपोर्टिंग पर भी सवाल
NHRC ने कहा है कि अगर किसी बच्चे के यौन शोषण या उससे जुड़ी सामग्री के बारे में जानकारी मिलती है तो POCSO एक्ट की धारा 19 के तहत इसकी जानकारी पुलिस या Special Juvenile Police Unit (SJPU) को देना जरूरी है। आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि केवल किसी कंपनी की आंतरिक शिकायत व्यवस्था या सरकारी विभागों से पत्राचार इस कानूनी जिम्मेदारी की जगह नहीं ले सकता।
आयोग ने सुप्रीम कोर्ट के Just Rights for Children Alliance बनाम S. Harish मामले के फैसले का भी उल्लेख किया है। इसमें इलेक्ट्रॉनिक सबूत सुरक्षित रखने, समय पर रिपोर्टिंग, जांच में समन्वय और बच्चों की पहचान कर उन्हें बचाने की जरूरत पर जोर दिया गया था।
Meta के AI टूल पर भी उठे सवाल
मामला सिर्फ विज्ञापनों तक सीमित नहीं है। NHRC के सामने रखी गई अतिरिक्त शिकायत में Meta के AI आधारित टूल्स को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। शिकायत में दावा किया गया कि Meta के टूल कंटेंट के आइडिया, पोस्ट का फॉर्मेट, स्लाइड की व्यवस्था, कैप्शन, पोस्ट करने का समय, ऑडियंस बढ़ाने की रणनीति और यहां तक कि कमाई यानी monetisation के तरीके सुझा सकते हैं।
आयोग ने कहा कि इससे यह सवाल उठता है कि जब कोई डिजिटल प्लेटफॉर्म सिर्फ दूसरे लोगों का कंटेंट होस्ट करने के बजाय कंटेंट बनाने, बदलने, सुझाने, आगे पहुंचाने या उससे कमाई कराने में सक्रिय भूमिका निभाता है, तो क्या उसकी कानूनी जिम्मेदारी भी अलग तरीके से तय होनी चाहिए।
बच्चों की सुरक्षा को सबसे ऊपर रखने की बात
NHRC ने साफ कहा कि यह मामला सिर्फ आपत्तिजनक ऑनलाइन कंटेंट का नहीं है। इसके पीछे किसी बच्चे के यौन शोषण, उसकी रिकॉर्डिंग, उसे ऑनलाइन फैलाने और उससे कमाई करने जैसे गंभीर आरोप हैं। आयोग ने कहा कि ऐसे मामलों में बच्चे की पहचान, उसे बचाना, सुरक्षा देना और पुनर्वास सबसे अहम होना चाहिए।
MeitY से पूछा- POCSO के तहत रिपोर्ट क्यों नहीं?
NHRC ने MeitY से पॉइंट वाइज रिपोर्ट मांगी है। मंत्रालय से पूछा गया है कि जब उसे इस मामले की जानकारी मिली तो क्या उसने POCSO की धारा 19 के तहत मामला Special Juvenile Police Unit या स्थानीय पुलिस को रिपोर्ट किया था। अगर रिपोर्ट नहीं की गई तो इसके लिए जिम्मेदार अधिकारी या प्राधिकरण कौन था और क्या कार्रवाई की गई, इसकी जानकारी भी मांगी गई है।
साथ ही MeitY से यह भी पूछा गया है कि Meta के AI और एल्गोरिदम आधारित सिस्टम को देखते हुए क्या उसे ऑनलाइन कंटेंट क्यूरेटर या पब्लिशर के तौर पर सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के नियामकीय दायरे में देखा जाना चाहिए।
सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय से भी जवाब तलब
NHRC ने सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय से भी पूछा है कि अगर Meta के AI या एल्गोरिदम सिस्टम खुद कंटेंट बनाते, बदलते, क्यूरेट करते, सुझाते, प्रकाशित या बड़े स्तर पर पहुंचाते हैं, तो क्या ऐसी स्थिति में Meta को IT Rules, 2021 के तहत पब्लिशर या ऑनलाइन क्यूरेटेड कंटेंट के पब्लिशर के तौर पर देखा जा सकता है।
दिल्ली पुलिस को भी 2 हफ्ते का समय
दिल्ली पुलिस की ओर से पहले दी गई रिपोर्ट को NHRC ने रिकॉर्ड पर लिया है। अब दिल्ली पुलिस कमिश्नर को दो हफ्ते का अतिरिक्त समय दिया गया है। उनसे मामले में की गई कार्रवाई और Telegram से मांगी गई या मिली जानकारी, साथ ही उसके आधार पर की गई आगे की कार्रवाई का ब्योरा देने को कहा गया है।
NHRC ने MeitY, सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय और दिल्ली पुलिस कमिश्नर समेत संबंधित अधिकारियों से दो हफ्ते के भीतर अलग-अलग और पॉइंट वाइज रिपोर्ट मांगी है। आयोग ने साफ किया है कि सिर्फ सामान्य तौर पर 'इंटरमीडियरी नियमों का पालन' करने की बात कहकर जवाब नहीं दिया जा सकता, बल्कि संबंधित सवालों का जवाब रिकॉर्ड के आधार पर देना होगा।
