भोपाल के ऐतिहासिक और जीवनदायिनी भोज वेटलैंड (अपर एवं लोअर लेक) की सुरक्षा को लेकर राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT), सेंट्रल जोन बेंच, भोपाल ने एक बेहद कड़ा और ऐतिहासिक आदेश जारी किया है। याचिकाकर्ता राशिद नूर खान की याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति शिव कुमार सिंह और विशेषज्ञ सदस्य सुधीर कुमार चतुर्वेदी की पीठ ने राज्य सरकार और प्रशासनिक अधिकारियों को जमकर फटकार लगाई।
खतरे में भोज वेटलैंड! (फोटो- wikipedia)
अधिकरण ने साफ कहा कि भोपाल के लाखों नागरिकों के पेयजल का आधार यह अंतरराष्ट्रीय महत्व का रामसर स्थल अपने इतिहास के सबसे बड़े संकट से गुजर रहा है। सुप्रीम कोर्ट के पुराने निर्देशों की अवहेलना पर नाराजगी जताते हुए एनजीटी ने सख्त लहजे में कहा कि अवैध निर्माणों और अतिक्रमण से अब सख्ती से निपटा जाएगा।
एनजीटी के आदेश में और क्या?
FTL से 50 और 250 मीटर तक निर्माण पर रोक
एनजीटी के आदेश के मुताबिक, झील के Full Tank Level (FTL) से निर्धारित दूरी के भीतर किसी भी तरह के नए निर्माण की अनुमति नहीं होगी।
- शहरी क्षेत्र: FTL से 50 मीटर तक का क्षेत्र नो-कंस्ट्रक्शन जोन रहेगा।
- ग्रामीण क्षेत्र: FTL से 250 मीटर तक किसी भी प्रकार का निर्माण प्रतिबंधित रहेगा।
तीन महीने में हटाने होंगे अवैध निर्माण
NGT ने भोज वेटलैंड और उसके आसपास के बफर क्षेत्र में मौजूद अवैध निर्माणों के खिलाफ कार्रवाई का निर्देश दिया है। आदेश के मुताबिक, कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद ऐसे सभी अवैध निर्माणों को तीन महीने के भीतर हटाना होगा। अधिकरण के इस आदेश से झील के आसपास लंबे समय से मौजूद अतिक्रमण और अवैध निर्माणों पर कार्रवाई तेज होने की संभावना है।सिर्फ अतिक्रमणकारी नहीं, जिम्मेदार अफसर भी निशाने पर
NGT ने प्रशासनिक अधिकारियों की जवाबदेही को लेकर भी कड़ा रुख अपनाया है। अधिकरण ने कहा कि यदि किसी अधिकारी की लापरवाही या मिलीभगत के कारण अवैध निर्माण या अतिक्रमण हुआ है, तो उसकी व्यक्तिगत जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए। नगरीय विकास विभाग को ऐसे अधिकारियों के खिलाफ सख्त विभागीय कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।
झील में सीवेज और औद्योगिक पानी डालने पर रोक
भोज वेटलैंड में बिना उपचारित सीवेज, कचरा, रेत, मिट्टी या औद्योगिक रासायनिक अपशिष्ट के प्रवेश को रोकने के भी निर्देश दिए गए हैं। नगर निगम और जिला प्रशासन को यह सुनिश्चित करने को कहा गया है कि बिना उपचारित गंदा पानी और अन्य प्रदूषक झील में न पहुंचें।FTL को लेकर विवाद सुलझाने के लिए सात सदस्यीय समिति
झील के Full Tank Level को लेकर विवाद खत्म करने के लिए NGT ने वैज्ञानिक सीमांकन की व्यवस्था करने को कहा है। इसके लिए सात विशेषज्ञों की तकनीकी समिति गठित की गई है। इस समिति में MANIT, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB), मध्य प्रदेश राज्य वेटलैंड प्राधिकरण और जल संसाधन विभाग समेत संबंधित संस्थानों के प्रतिनिधि शामिल होंगे। आदेश में कहा गया है कि झील के गेट तब तक नहीं खोले जाएं जब तक पानी निर्धारित FTL स्तर तक नहीं पहुंच जाता।
पूरे प्रदेश के छोटे जल निकायों पर भी नजर
एनजीटी ने केवल भोपाल ही नहीं, बल्कि पूरे मध्य प्रदेश में मौजूद 2.25 हेक्टेयर से छोटे लगभग 5,55,557 तालाबों और जल निकायों की पहचान, सीमांकन और संरक्षण के लिए 'स्टेट वेटलैंड अथॉरिटी' को समयबद्ध रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया है। इस मामले में अगली सुनवाई के लिए 2 सितंबर 2026 की तारीख तय की गई है। अधिकरण के इस सख्त रुख से साफ है कि अब पर्यावरण की अनदेखी और प्रशासनिक लापरवाही को बिल्कुल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
