ISRO का नया मिशन, चंद्रमा के शिव शक्ति प्वाइंट से लाएगा मिट्टी के नमूने, ऐसे दिया जाएगा अंजाम

  • Authored by: अमित कुमार मंडल
  • Updated Nov 20, 2023, 12:43 PM IST

इसरो अब एक बड़े मिशन की योजना बना रहा है, जहां मिट्टी या चट्टान के नमूने वापस लाने की कोशिश की जाएगी। अगले पांच या सात साल तक हम इस चुनौती को पूरा किया जाएगा।

ISRO Mission: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) चंद्रमा से मिट्टी या चट्टान के नमूने एकत्र करने और उन्हें पृथ्वी पर ले लाने के अपने मिशन के लिए तैयार हो रहा है। लूनर सैंपल रिटर्न मिशन (LSRM) नाम की यह महत्वाकांक्षी परियोजना भारत के अंतरिक्ष खोज प्रयासों के लिए एक मील का पत्थर साबित होगी। इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, इसरो में स्पेस एप्लीकेशन सेंटर (SAC) के निदेशक नीलेश देसाई ने मिशन के बारे में जानकारी साझा करते हुए कहा कि इसरो अब एक बड़े मिशन की योजना बना रहा है, जहां हम मिट्टी या चट्टान के नमूने वापस लाने की कोशिश करेंगे। उम्मीद है कि अगले पांच से सात साल तक हम इस चुनौती को पूरा करने में सक्षम होंगे।

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इसरो का नया मिशन

LSRM में चार प्रमुख मॉड्यूल

LSRM में चार प्रमुख मॉड्यूल शामिल हैं: ट्रांसफर मॉड्यूल, लैंडर मॉड्यूल, एसेंडर मॉड्यूल और री-एंट्री मॉड्यूल। विशेष रूप से यह मिशन इसरो के पारंपरिक दृष्टिकोण से हटकर होगा, जिसमें जटिल ऑपरेशन को अंजाम देने के लिए दो अलग-अलग लॉन्च व्हीकल का उपयोग किया जाएगा। मिशन के डिजाइन में चंद्र सतह पर शिव शक्ति बिंदु पर नमूना लेने के लिए एक रोबोटिक आर्म सिस्टम शामिल है। इसके बाद नमूनों को एसेंडर मॉड्यूल पर लोड किया जाएगा। चंद्र सतह से उड़ान भरने के बाद एस्केंडर मॉड्यूल ट्रांसफर मॉड्यूल पर डॉक करेगा, जहां एक अन्य रोबोटिक आर्म नमूनों को री-एंट्री मॉड्यूल में ट्रांसफर कर देगी। आखिर में ट्रांसफर और री-एंट्री मॉड्यूल दोनों के पृथ्वी पर लौटने और उतरने का अनुमान है।

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