देश की सबसे प्रतिष्ठित मेडिकल प्रवेश परीक्षा 'नीट' (NEET) एक बार फिर दागदार हुई है। लेकिन इस बार जो खुलासा हुआ है, इसमें कई तहें हैं है। जयपुर के बिवाल ब्रदर्स ने मिलकर शिक्षा को व्यापार और जालसाजी का ऐसा अड्डा बना दिया, जहां काबिलियत की नहीं बल्कि 'करोड़ों की बोली' की कीमत थी। इस पूरे स्कैंडल का सबसे शर्मनाक चेहरा है ऋषि बिवाल। वह ग्रेस अंक लेकर जैसे-तैसे सेकेंड डिवीजन पास हुआ। राजस्थान बोर्ड की 12वीं की मार्कशीट के मुताबिक, ऋषि को फिजिक्स की थ्योरी में 9, केमिस्ट्री में 15 और बायोलॉजी में महज 20 नंबर मिले थे। हैरानी की बात यह है कि जिस छात्र को बायोलॉजी की बुनियादी समझ तक नहीं थी, उसे डॉक्टर बनाने के लिए उसके पिता दिनेश बिवाल ने कथित तौर पर 10 लाख रुपये में नीट का पेपर खरीदा। यह उन लाखों ईमानदार छात्रों के गाल पर तमाचा है जो दिन-रात एक कर इस परीक्षा की तैयारी करते हैं। आप एक बार ऋषि की मार्कशीट देखें।
नीट पेपर लीक के आरोपी बिवाल ब्रदर्स का पर्दाफाश
ऋषि की मार्कशीट
बिवाल परिवार का कमाल या सिंडिकेट का जाल?
जांच में सामने आया है कि यह कोई इकलौता मामला नहीं था। दावा किया जा रहा है कि बिवाल परिवार ने पिछले दो सालों में यानी 2024 और 2025 में अपने घर के पांच सदस्यों को इसी तरह लीक पेपर के दम पर डॉक्टर बनाया है। मांगीलाल बिवाल का बेटा विकास और बेटी प्रगति (दौसा मेडिकल कॉलेज)। घनश्याम बिवाल की बेटियां पलक (SMS मेडिकल कॉलेज, जयपुर) और सानिया (मुंबई मेडिकल कॉलेज) और दिनेश बिवाल की बेटी गुंजन (बनारस मेडिकल कॉलेज) दावा है कि 2025 में इन पांचों ने 25 लाख रुपये में खरीदे गए पेपर को पढ़कर सरकारी कॉलेजों में सीट हासिल की। आज ये लोग फर्जीवाड़े के दम पर सिस्टम में घुस चुके हैं, जो भविष्य में मरीजों की जान के साथ खिलवाड़ करेंगे।
CBI के डर से 'डॉक्टर बिटिया' फरार
जैसे ही CBI ने शिकंजा कसा, फर्जीवाड़े की पोल खुलने लगी। मांगीलाल की बेटी प्रगति बिवाल, जो दौसा मेडिकल कॉलेज में प्रथम वर्ष की छात्रा है, 13 मई से कॉलेज से गायब है। CBI अब प्रगति और इस परिवार के अन्य सदस्यों से जुड़े डिजिटल सबूतों, व्हाट्सएप चैटिंग और बैंक ट्रांजैक्शन की जांच कर रही है।
कैसे फैला जहर? नासिक से हरियाणा और फिर देश भर में
सूत्रों के मुताबिक, पेपर लीक का पहला सेट नासिक (महाराष्ट्र) में बना, जिसे हरियाणा में 10 अलग-अलग सेटों में तैयार किया गया। वहां से यह जहर जयपुर, जमवा रामगढ़ और फिर सीकर के कोचिंग संस्थानों तक पहुंचा। सीकर में तो परीक्षा से 15 घंटे पहले ही एक 'गेस पेपर' वायरल हुआ, जिसके 135 प्रश्न (केमिस्ट्री के पूरे 45 सवाल) हूबहू मुख्य परीक्षा में आए। यह माफिया टेलीग्राम और व्हाट्सएप के जरिए 30 हजार से लेकर 5 लाख रुपये तक में पेपर बेच रहा था।
'Clean करो NEET': माफिया का अंत जरूरी
पिछले तीन सालों में दूसरी बार नीट का पेपर लीक होना सिस्टम की विफलता को दर्शाता है। शिक्षा के ये सौदागर न केवल देश की साख को बट्टा लगा रहे हैं, बल्कि उन मध्यमवर्गीय परिवारों की उम्मीदों का कत्ल कर रहे हैं जो अपने बच्चों को पढ़ाने के लिए जीवन भर की जमापूंजी लगा देते हैं। अब वक्त आ गया है कि इन 'पेपर चोरों' और फर्जी डॉक्टरों के सिंडिकेट को जड़ से उखाड़ फेंका जाए। टाइम्स नाउ नवभारत 'Clean करो NEET' की मुहिम चला रहा है। आप भी #TheNEETFiles हैशटैग का इस्तेमाल कर सोशल मीडिया पर अपने विचार साझा कर सकते हैं।
