वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को लेकर शुरू हुआ विवाद अब केवल चुनाव आयोग और विपक्ष के बीच सीमित नहीं रह गया है, बल्कि इसकी आंच सत्तारूढ़ एनडीए (NDA) गठबंधन तक पहुंच गई है। चुनाव आयोग के कामकाज और आंतरिक फैसलों पर उठ रहे सवालों के बीच एनडीए के चार प्रमुख सहयोगी दलों-चिराग पासवान की एलजेपी (रामविलास), उपेंद्र कुशवाहा की आरएलएम, एचडी कुमारस्वामी की जेडी (एस) और चंद्रबाबू नायडू की टीडीपी ने आयोग से जनता के सामने स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है।
विपक्ष के बाद अब NDA सहयोगियों ने मोर्चा खोला, मांगी सफाई (फाइल फोटो)
विवाद की शुरुआत तब हुई जब इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट में दावा किया गया कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और दो अन्य चुनाव आयुक्तों के बीच SIR प्रक्रिया से जुड़े कई फैसलों को लेकर मतभेद थे। इस रिपोर्ट के सामने आते ही विपक्षी दल हमलावर हो गए और मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग करने लगे। यद्यपि चुनाव आयोग ने बयान जारी कर कहा कि किसी संस्था में अलग-अलग राय होना सामान्य है और अंतिम फैसले सर्वसम्मति से लिए गए थे, लेकिन विवाद शांत नहीं हुआ।
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अब NDA के सहयोगी दलों ने भी इस मुद्दे पर आयोग को दिखाया आईना
अब एनडीए के सहयोगी दलों ने भी इस मुद्दे पर आयोग को आईना दिखाया है। चिराग पासवान ने कहा कि चुनाव आयोग एक स्वतंत्र और संवैधानिक संस्था है। अगर इसकी कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं तो आयोग को स्वयं आगे आकर अपना पक्ष मजबूती से रखना चाहिए ताकि आम लोगों के मन में लोकतंत्र और चुनावी प्रक्रिया को लेकर कोई संशय न रहे।
वहीं उपेंद्र कुशवाहा और केंद्रीय मंत्री एचडी कुमारस्वामी ने भी स्पष्ट किया कि आयोग के अंदर क्या चल रहा है और सच क्या है, यह तीनों आयुक्तों को देश के सामने रखना चाहिए। टीडीपी ने भी पारदर्शिता की वकालत करते हुए कहा कि इससे जनता का भरोसा आयोग में बढ़ेगा।
JDU ने चुनाव आयोग का किया बचाव
दिलचस्प बात यह है कि इस मुद्दे पर एनडीए के भीतर अलग-अलग सुर देखने को मिल रहे हैं। जहां चार सहयोगी दल चुनाव आयोग से जवाबदेही और पारदर्शिता की मांग कर रहे हैं, वहीं जनता दल यूनाइटेड (JDU) के वरिष्ठ नेता ललन सिंह आयोग के बचाव में खड़े नजर आए। उन्होंने कहा कि SIR आयोग का संवैधानिक काम है और सुप्रीम कोर्ट भी इस प्रक्रिया पर अपनी मुहर लगा चुका है, इसलिए विपक्ष बेवजह का हंगामा कर रहा है।
कुल मिलाकर, SIR प्रक्रिया को लेकर छिड़ी यह बहस अब एक बड़े राजनीतिक मोड़ पर पहुंच चुकी है। चुनावी प्रक्रिया से जनता का विश्वास न डिगे, इसके लिए अब एनडीए के अपने ही दल आयोग से खुलकर सामने आने और भ्रम की स्थिति खत्म करने की अपील कर रहे हैं।
