'NCPCR सिर्फ कागजों पर नहीं रह सकता’, शिक्षा के अधिकार पर सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी

सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रीय बाल संरक्षण अधिकार आयोग (NCPCR) के रवैये पर नाराजगी जताई है। शीर्ष कोर्ट ने चेयरपर्सन और डायरेक्टर को अगली सुनवाई में व्यक्तिगत रूप से पेश होने का आदेश दिया है।

निजी गैर-सहायता प्राप्त स्कूलों में आर्थिक रूप से कमजोर और वंचित वर्ग के बच्चों के लिए 25 फीसदी आरक्षण लागू करने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग यानी NCPCR के रवैये पर नाराजगी जताई। जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की बेंच ने कहा कि आयोग की भूमिका सिर्फ राज्यों से आंकड़े जुटाने तक सीमित नहीं है, बल्कि उसे यह सुनिश्चित करने में भूमिका निभानी होगी कि कानून का उद्देश्य जमीन पर लागू हो।

सुप्रीम कोर्ट

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कोर्ट ने सुनवाई के दौरान पूछा, “वे इतने उदासीन तरीके से कैसे काम कर सकते हैं? NCPCR को कौन चलाता है? हम अगले सुनवाई में उस अधिकारी को मौजूद रहने के लिए कहेंगे।” कोर्ट ने साफ किया कि यह अवमानना की कार्यवाही नहीं है, लेकिन आयोग को अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी।

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