पश्चिम एशिया में जारी जंग के बीच भारत अपनी सैन्य ताकत को बढ़ाने में लगा है। इसी क्रम में भारतीय नौसेना को एक और बड़ी सफलता मिली है। कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड (CSL)कोच्चि द्वारा बनाए गए आठ एंटी-सबमरीन वॉरफेयर शैलो वाटर क्राफ्ट (ASW-SWC)में से दूसरे पोत ‘मालवन’ को आज औपचारिक रूप से नौसेना को सौंप दिया गया। इस पोत को मेक इन इंडिया के तहत पूरी तरह स्वदेशी डिजाइन से बनाया गया है, जो भारतीय नौसेना की विशिष्ट आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार किया गया है।
यह पोत मारक क्षमता,छिपकर हमला करने की क्षमता और गतिशीलता के मिश्रण से सुसज्जित है। इसे पनडुब्बियों का पता लगाने,तटीय गश्त करने और भारत के रणनीतिक समुद्री मार्गों की सुरक्षा करने के लिए बनाया गया है।
ऐतिहासिक शहर मालवन के नाम पर रखा गया नाम
इस पोत का नाम महाराष्ट्र के ऐतिहासिक तटीय कस्बे मालवण पर रखा गया है,जो छत्रपति शिवाजी महाराज की गौरवशाली समुद्री विरासत से गहराई से जुड़ा है। इसके साथ ही यह भारतीय नौसेना के पुराने पोत INS मालवन की धरोहर को भी आगे बढ़ाता है। INS मालवन 2003 तक नौसेना में माइन्सवीपर की भूमिका में सेवारत रहा।समुद्र की गहराई में दुश्मन खोजने के लिए डिजाइन
लगभग 80 मीटर लंबे और 1,100 टन वजनी इस ASW–SWC को तटीय क्षेत्रों में अंडरवॉटर सर्विलांस, एंटी-सबमरीन वॉरफेयर (ASW),लो-इंटेंसिटी मैरीटाइम ऑपरेशंस (LIMO) और माइन वॉरफेयर जैसी मिशन-क्रिटिकल भूमिकाओं के लिए डिज़ाइन किया गया है।
इसके अलावा, वॉटरजेट प्रोपल्शन से लैस इस पोत पर अत्याधुनिक हथियार और सेंसर लगाए गए हैं। इनमें टॉरपीडो, मल्टीफंक्शनल ASW रॉकेट,एडवांस्ड रडार,हाई-एंड सोनार सिस्टम शामिल हैं। इसकी ये सभी क्षमताएं मालवन को भारत के तटीय जलक्षेत्र में पनडुब्बी-रोधी अभियानों के लिए बेहद अहम बनाते हैं।
‘आत्मनिर्भर भारत’का बेहतरीन उदाहरण
‘मालवन' का एक और सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि इसे मेक इन इंडिया पहल के तहत निर्मित किया गया है। यह पोत भारत की स्वदेशी युद्धपोत निर्माण क्षमता को मजबूत करता है और ‘आत्मनिर्भर भारत’मिशन की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर माना जा रहा है।
