Murshidabad Violence hearing in SC: सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार को मुर्शिदाबाद हिंसा मामले पर सुनवाई होगी। कोर्ट वकील विष्णु शंकर जैन की अर्जी पर सुनवाई करेगा। जैन ने अपनी अर्जी में पश्चिम बंगाल में राष्ट्रपति शासन लागू करने की मांग की है। इसके अलावा मुर्शिदाबाद हिंसा की जांच तीन सेवानिवृत्त न्यायाधीशों से कराने और बंगाल से हिंदुओं के पलायन पर ममता बनर्जी सरकार से रिपोर्ट देने की मांग की गई है। जैन का दावा है कि ममता सरकार में पश्चिम बंगाल में हिंदुओं को निशाना बनाकर उन पर हमले हो रहे हैं।
सुप्रीम कोर्ट में मुर्शिदाबाद हिंसा की सुनवाई।
दरअसल, जैन ने सोमवार को न्यायमूर्ति बीआर गवई और ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ के समक्ष पेश होकर मुर्शिदाबाद हिंसा मामले का उल्लेख किया। कोर्ट इस पर सुनवाई के लिए तैयार हो गया। जैन की याचिका पर जस्टिस बीआर गवई की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा, ‘आप चाहते हैं कि हम केंद्र सरकार को राष्ट्रपति शासन लागू करने का निर्देश दें?’
अर्ध-सैनिक बल की तैनाती की मांग
इस पर वकील जैन ने कहा कि पश्चिम बंगाल में जिस तरह से हिंदुओं को निशाना बनाया जा रहा है, उसे देखते हुए वहां पर अर्धसैनिक बलों को तैनात करने की जरूरत है। जैन ने कहा कि इस मामले पर पहले से बंगाल मे चुनाव बाद हिंसा पर उनकी याचिका पहले से लंबित है जिस पर कोर्ट 2022 में नोटिस जारी कर चुका है।
हिंसा में कम से कम तीन लोगों की मौत
बता दें कि 8-12 अप्रैल को वक्फ (संशोधन) अधिनियम के विरोध में हुए प्रदर्शनों के दौरान भड़की हिंसा में कम से कम तीन लोगों की मौत हो गई। इसके बाद इस सिलसिले में अब तक सैकड़ों लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। सबसे ज्यादा हिंसा धुलियान, सुती और जंगीपुर में हुई। वक्फ अधिनियम में संशोधन के खिलाफ 11 और 12 अप्रैल को प्रदर्शन के दौरान भीड़ के हमले के बाद, लगभग 400 लोग, जिनमें ज्यादातर महिलाएं और बच्चे थे, धुलियान, शमशेरगंज स्थित अपना घर-बार छोड़कर मालदा के वैष्णवनगर चले गए थे।
दो और आरोपी गिरफ्तार
इस बीच, पश्चिम बंगाल एसटीएफ ने ओडिशा पुलिस की मदद से सोमवार को झारसुगुड़ा जिले से जियाउल शेख के दो बेटों को गिरफ्तार किया। एक अधिकारी ने बताया कि वह मुर्शिदाबाद के जाफराबाद में पिछले दिनों हुई हिंसा के दौरान पिता-पुत्र की हत्या के मुख्य संदिग्धों में से एक है। पुलिस ने शेख के दो बेटों को गिरफ्तार कर लिया है, जिनकी पहचान बानी इसराइल और सेफाउल हक के रूप में हुई है।
