MP Dowry Death: मॉडल से अभिनेत्री बनीं ट्विशा शर्मा के कथित दहेज हत्या मामले में आरोपी सेवानिवृत्त जिला और सत्र न्यायाधीश गिरिबाला सिंह ने भोपाल न्यायिक दंडाधिकारी के समक्ष आवेदन प्रस्तुत कर मृतका के परिजनों के मोबाइल जब्त कर उसकी फोरेंसिक जांच कराए जाने की मांग की है। सिंह ने इसके साथ ही अदालत से यह आग्रह भी किया कि त्विषा की आत्महत्या से संबंधित सोशल मीडिया पर प्रसारित हो रहे एक सीसीटीवी फुटेज की भी तकनीकी जांच कराई जाए ताकि शव को अस्पताल पहुंचाए जाने के समय को लेकर पैदा किए जा रहे विवाद पर सत्यता सामने आए।
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उन्होंने अदालत से इन सब मामलों को विशेष जांच दल (एसआईटी) के संज्ञान में लाने की भी मांग की। इस मामले में भोपाल की अदालत ने गिरिबाला सिंह को अग्रिम जमानत दे दी थी जबकि उनके पुत्र और आरोपी समर्थ सिंह की याचिका खारिज कर दी थी।
बता दें कि गिरीबाला सिंह के वकील ने भोपाल न्यायिक दंडाधिकारी के समक्ष आवेदन दाखिल कर भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता का हवाला देते हुए यह अनुरोध किए हैं।
सीसीटीवी कैमरे की सर्विसिंग नहीं...
आवेदन में उन्होंने कहा है कि जो वीडियो फुटेज जब्त हुआ है, उस सीसीटीवी कैमरे की सर्विसिंग नहीं होने की वजह से उसकी 'टाइमिंग' दो से तीन घंटे विलम्ब दिखाई दे रही है। उन्होंने कहा कि इसकी वजह से पोस्टमार्टम रिपोर्ट में शव को पहुंचाए जाने के समय को लेकर भ्रम पैदा हुआ। गिरिबाला सिंह ने अपने आवेदन में कहा कि मृतका के परिजनों की ओर से सोशल मीडिया पर इस संबंध में अभियान चलाया गया है जो गलत है और फर्जी है।
उन्होंने ट्विशा के परिजनों के मोबाइल जब्त करके और उसकी फोरेंसिक जांच कराए जाने की मांग की। बता दें कि ट्विशा की 12 मई को भोपाल के कटारा हिल्स स्थित ससुराल में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गयी थीं। ट्विशा (33) के परिवार ने उसके ससुराल वालों पर दहेज के लिए प्रताड़ित करने का आरोप लगाया है। वहीं, सिंह परिवार का दावा है कि त्विषा नशीले पदार्थों की आदी थीं। पुलिस ने समर्थ सिंह और गिरिबाला सिंह के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता तथा दहेज निषेध अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की है।
गिरिबाला सिंह के पास बचने का आखिर मौका
मध्यप्रदेश पुलिस ने दहेज के लिए कथित तौर पर उत्पीड़न के कारण ट्विशा शर्मा की मौत के मामले में उसकी सास एवं पूर्व न्यायाधीश गिरिबाला सिंह को बयान दर्ज कराने के लिए तीसरा और अंतिम नोटिस जारी किया है। पुलिस के एक अधिकारी ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी। एक आधिकारिक परिपत्र में कहा गया है कि मध्यप्रदेश सरकार ने यह तय करने के लिए जांच शुरू कर दी है कि क्या सिंह उपभोक्ता अदालत के अध्यक्ष के रूप में बनी रह सकती हैं।
भोपाल के पुलिस आयुक्त संजय कुमार ने फोन पर कहा, 'उन्हें (बयान दर्ज करने के लिए) तीसरा और आखिरी नोटिस जारी किया गया है। अगर वह सहयोग नहीं करती हैं तो हम उनकी जमानत रद्द करने के लिए सत्र अदालत का रुख करेंगे।' पुलिस सूत्रों ने बताया कि उन्हें इस मामले में अपना बयान दर्ज कराने के लिए नोटिस पोस्ट और व्हाट्सऐप के जरिए दिया गया था। सूत्रों ने कहा कि पिछले दो मौकों पर जब नोटिस दिए गए थे, तो वह अपने आवास पर नहीं मिली।
उन्होंने कहा कि महिलाओं और बच्चों को बयान दर्ज करने के लिए अदालत में नहीं बुलाया जाता है और घर पर ही बयान दर्ज किया जाता है। इस बीच, ट्विशा शर्मा के परिवार के वकील अंकुर पांडे ने बताया कि गिरिबाला सिंह को अग्रिम जमानत दिए जाने को चुनौती देते हुए जबलपुर में मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय की प्रधान पीठ के समक्ष एक याचिका दायर की गई है।
