केंद्र सरकार ने बुधवार को राजनीतिक दलों को भरोसा दिलाया कि भारत की ऊर्जा सुरक्षा स्थिर बनी हुई है और अतिरिक्त खेप रास्ते में है। यह आश्वासन सर्वदलीय बैठक के दौरान दिया गया। केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि सभी दलों ने बैठक में सक्रिय रूप से हिस्सा लिया और ईरान, इज़राइल तथा अमेरिका के बीच चल रहे संघर्ष और भारत पर इसके संभावित प्रभावों को लेकर अपनी चिंताएं व्यक्त कीं।
पीएम मोदी (फाइल फोटो:PTI)
उन्होंने आगे कहा कि विपक्षी दलों ने स्थिति से निपटने में सरकार को पूरा समर्थन देने का आश्वासन दिया है। उन्होंने कहा, 'विपक्ष के सभी साथियों ने कहा है कि संकट की इस घड़ी में सरकार जो भी फ़ैसला लेगी, मौजूदा हालात के हिसाब से जो भी कदम उठाएगी, हर कोई एकजुट होकर उसका समर्थन करेगा।' उन्होंने यह भी बताया कि सरकार ने सभी दलों के साथ पर्याप्त जानकारी साझा की है।
सरकार ने देश में 'पर्याप्त ऊर्जा सुरक्षा' का भरोसा दिलाया
सूत्रों के अनुसार, सरकार ने कहा कि देश में 'पर्याप्त ऊर्जा सुरक्षा' है और देश की ऊर्जा ज़रूरतें पूरी की जा रही हैं। सरकार ने यह भी बताया कि उसने पहले ही एडवांस बुकिंग कर ली है, कई देशों के साथ बातचीत चल रही है, और बिना किसी रुकावट के सप्लाई सुनिश्चित करने के लिए उसने अपने समझौतों में विविधता लाई है।
'अगले 4-5 दिनों में चार जहाज़ों के बंदरगाह पर पहुंचने की उम्मीद'
LPG की उपलब्धता और स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज के रास्ते होने वाली शिपमेंट को लेकर विपक्ष द्वारा जताई गई चिंताओं पर जवाब देते हुए, सरकार ने कहा कि सब कुछ नियंत्रण में है और अगले 4-5 दिनों में चार जहाज़ों के बंदरगाह पर पहुंचने की उम्मीद है। सरकार ने इस बात पर भी जोर दिया कि किसी भी चीज़ की कोई कमी नहीं है और पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है।
सरकार ने ज़ोर देकर कहा कि 'चिंता की कोई बात नहीं है' और घबराने की कोई ज़रूरत नहीं है। सरकार ने कहा कि वह सभी को साथ लेकर चल रही है और विपक्ष के साथ किसी भी समय चर्चा के लिए तैयार है।
ट्रंप को PM का संदेश बताया
विदेश मंत्री ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ प्रधानमंत्री की पिछली बातचीत का ज़िक्र करते हुए बताया कि संदेश साफ़ था: युद्ध खत्म होना चाहिए, क्योंकि इससे सभी को नुकसान हो रहा है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने चर्चा की शुरुआत करते हुए इस बात पर ज़ोर दिया कि भारत के लोगों का ध्यान रखा जाना ज़रूरी है। विदेश सचिव ने एक प्रेजेंटेशन दिया, जिसमें उन्होंने व्यापक भू-राजनीतिक स्थिति का विस्तार से ब्यौरा दिया; इसमें ईरान से जुड़े घटनाक्रम, जारी संघर्ष और ऊर्जा सुरक्षा से जुड़ी चिंताएं शामिल थीं।
सूत्रों ने बताया कि सरकार की ओर से दिया गया मुख्य संदेश यह था कि 'हालात काबू में हैं' और घरेलू चिंताओं को बाकी सभी चीज़ों से ज़्यादा प्राथमिकता दी जाएगी।
'यह सिलसिला 1981 से ही चला आ रहा है'
विपक्ष से जुड़े सूत्रों के अनुसार, जब पाकिस्तान द्वारा ईरान के साथ मध्यस्थता का मुद्दा उठा, तो सरकार ने कहा कि यह सिलसिला 1981 से ही चला आ रहा है। एक तरह से, अमेरिका वर्षों से पाकिस्तान का इस्तेमाल ईरान के साथ बातचीत में खुद को जोड़े रखने के लिए करता रहा है-जिसमें 'इंटरेस्ट सेक्शंस' (हित अनुभागों) के ज़रिए की जाने वाली बातचीत भी शामिल है।
