Operation Sindoor: कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और तिरुवनंतपुरम सांसद शशि थरूर इन दिनों अपने बयानों की वजह से पार्टी के निशाने पर हैं। इस बीच, नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने शशि थरूर को बड़ी जिम्मेदारी देने का मन बनाया है। सरकार पहलगाम में हुए आतंकी हमले के जवाब में चलाए गए 'ऑपरेशन सिंदूर' के बाद आक्रामक राजनयिक अभियान के तहत वैश्विक स्तर पर भारत के पक्ष को मजबूती से रखने और पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद को बेनकाब करने के लिए एक योजना तैयार की है जिसमें शशि थरूर को शामिल किया जा सकता है।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और तिरुवनंतपुरम सांसद शशि थरूर (फोटो साभार: @ShashiTharoor)
कांग्रेस सूत्रों के हवाले से बुधवार को सामने आया था कि पार्टी में सबको अपनी राय रखने की आजादी है, लेकिन शशि थरूर ने भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव से जुड़े मुद्दे पर अपने बयानों से 'लक्ष्मण रेखा' लांघ दी है। हालांकि, सरकार ने उन्हें वैश्विक स्तर पर पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद को बेनकाब करने की जिम्मेदारी देने की योजना बनाई है। सरकार अगले सप्ताह से विभिन्न देशों में कई बहुदलीय प्रतिनिधिमंडल भेजेगी।
मुख्य विपक्षी कांग्रेस सहित विभिन्न राजनीतिक दलों के सांसदों से सरकार ने इसके लिए आह्वान किया है और कुछ दलों ने राजनयिक प्रयास के लिए अपने सदस्यों को भेजने की मंजूरी भी दे दी है। विदेश जाने वाले इन प्रतिनिधिमंडलों या उनके सदस्यों की संख्या को लेकर फिलहाल कोई स्पष्ट जानकारी नहीं है, लेकिन कुछ नेताओं का कहना है कि 30 से ज्यादा सांसद हो सकते हैं।
लक्ष्मण रेखा लांघने वाले थरूर भी लिस्ट में शामिल!
हिंदी समाचार एजेंसी 'भाषा' ने सूत्रों के हवाले से बताया कि सरकार की सूची में विदेश मामलों पर संसदीय पैनल के प्रमुख शशि थरूर शामिल हैं। सूत्रों ने बताया कि सरकार की सूची में कांग्रेस के अन्य सांसद मनीष तिवारी, सलमान खुर्शीद और अमर सिंह भी शामिल हैं और कांग्रेस ने पुष्टि की है कि वह प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा होंगे। इस मामले पर फिलहाल सरकार की तरफ से आधिकारिक रूप से कुछ नहीं कहा गया है।
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने 'भाषा' को बताया कि संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने इस बारे में पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे से बात की है। जयराम रमेश ने कहा, ''प्रधानमंत्री ने पहलगाम आतंकी हमलों और ऑपरेशन सिंदूर पर दो सर्वदलीय बैठकों की अध्यक्षता करने से इनकार कर दिया। प्रधानमंत्री संसद का विशेष सत्र बुलाने पर सहमत नहीं हुए। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस सामूहिक संकल्प दिखाने और 22 फरवरी, 1994 को संसद द्वारा सर्वसम्मति से पारित प्रस्ताव को दोहराने की मांग कर रही है।''
